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Bihar SIR: चुनाव आयोग ने कहा- अब तक किसी राजनीतिक दल ने नहीं दर्ज करवाई आपत्ति, तेजस्वी बोले- जनता इलाज करेगी

Fri, 08 Aug 2025 10:37 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Fri, 08 Aug 2025 10:37 AM IST
सार

Bihar Election: चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता सूची प्रारूप में जिनका नाम छूट गया है तो वह कैंप में जाकर अपनी समस्या का समाधान करवा सकते हैं। जो पात्र मतदाता जो सूची में शामिल नहीं हो सका हो, वह अपना नाम जोड़ने, किसी अयोग्य नाम को हटाने या किसी प्रविष्टि में सुधार हेतु आवेदन कर सकता है।

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Bihar SIR: Election Commission said- after seven days no political party has lodged any Claims & Objections
मतदाता सूची पुनरीक्षण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार मतदाता सूची प्रारूप प्रकाशित होने के बाद सियासत जारी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के कई नेताओं ने गरीबों का नाम कटने का आरोप लगाया। लेकिन, चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन एक बार फिर से किया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार सुबह मतदाता पुनरीक्षण कार्य का डेली बुलेटिन जारी किया। कहा कि चुनाव आयोग बार बार कह रहा है कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में कोई भी योग्य मतदाता छूटने ना पाये और कोई भी अयोग्य मतदाता जुड़ने न पाये। चुनाव आयोग ने फिर से अपील करते हुए कहा कि एक अगस्त को जारी की गयी बिहार की प्रारूप मतदाता सूची में कोई भी त्रुटि दूर करने के लिये अपने दावे और आपति दर्ज करें। अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी दावा या आपत्ति नहीं दर्ज की है।

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बीएलए की संख्या 1,38,680 से बढ़ाकर 1,60,813 कर दी गई है
चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार में लंबी कतारों से बचने के लिए प्रति बूथ मतदाताओं की संख्या 1,200 तक सीमित करने वाला पहला राज्य बन गया। यहां मतदान केन्द्रों की संख्या 77,895 से बढ़ाकर 90,712 कर दी गई। वहीं बी.एल.ओ. की संख्या भी 77,895 से बढ़ाकर 90,712 कर दी गई। चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार के मतदाताओं की सहायता के लिए, स्वयंसेवकों की संख्या भी एक लाख से बढ़ाकर करीब लाख की जा रही है। बिहार के सभी 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने भी अपने बीएलए की संख्या 1,38,680 से बढ़ाकर 1,60,813 कर दी गई है। 
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जानिए, किन जिलों से कितने वोटरों का नाम हटा है
मतदाता पुनरीक्षण कार्य के बाद जो वोटर लिस्ट प्रकाशित किए गए हैं, उनमें सभी जिलों के हजारों लोगों के नाम कट गए हैं। इनमें पश्चिम चम्पारण से 191376, पूर्वी चम्पारण से 316793, शिवहर से 28166, सीतामढ़ी से 244962, मधुबनी से 352545, सुपौल से 128207, अररिया से 158072, किशनगंज से 145668, पूर्णिया से 273920, कटिहार से 184254, मधेपुरा से 98076, सहरसा से 131596, दरभंगा से 203315, मुजफ्फरपुर से 282845, गोपालगंज से 310363, सीवान से 221711, सारण से 273223, वैशाली से 225953, समस्तीपुर से 283955, बेगूसराय से 167756, खगड़िया से 79551, भागलपुर से 244612, बांका से 117346, मुंगेर से 74916, लखीसराय से 48824, शेखपुरा से 26256, नालंदा से 138505, पटना से 395500, भोजपुर से 190832, बक्सर से 87645, कैमूर (भभुआ) से 73940, रोहतास से 156148, अरवल से 30180, जहानाबाद से 53089, औरंगाबाद से 159980, गया से 245663, नवादा से 126450 और जमुई से 91882 मतदाताओं का नाम सूची प्रारूप में नहीं है।
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तेजस्वी ने पूछा- मृतक मतदाताओं के परिजनों से कौन सा दस्तावेज लिया गया था
वहीं तेजस्वी यादव ने एक बार फिर से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमला बोला है। कहा कि लोकतंत्र, संविधान तथा देश के साथ विश्वासघात कर रहे नैतिक रूप से भ्रष्ट एवं कायर अधिकारियों और संस्थाओं का देश की जनता अच्छे से इलाज करेगी।  सब्र का फल मीठा होता है। कहा कि हमलोगों ने सभी जिलाध्यक्ष, प्रधान महासचिव एवं माननीय विधायक एवं विधानपार्षद के साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की ड्राफ्ट सूची में पाई जा रही शिकायतों व विसंगतियों के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। तेजस्वी ने सोशल मीडिया के जरिए पूछा कि चुनाव आयोग ने जिन 65 लाख मतदाताओं के नाम विलोपित किए हैं, उन 65 लाख मतदाताओं को मृत, स्थानांतरित या अनुपस्थित घोषित करने का आधार क्या है? मृतक मतदाताओं के परिजनों से कौन सा दस्तावेज लिया जिसके आधार पर उनकी मौत की पुष्टि हुई?  जिन 36 लाख मतदाताओं को चुनाव आयोग स्थानांतरित बता रहे है, अस्थायी रूप से पलायित बता रहे है उसका क्या आधार क्या है? चुनाव स्पष्ट करें। अगर अस्थायी पलायन से 36 लाख गरीब मतदाताओं का नाम कटेगा तो फिर यह आंकड़ा भारत सरकार के अपने आंकड़ों के अनुसार बिहार से प्रति वर्ष बाहर जाने वाले तीन करोड़ पंजीकृत श्रमिकों से भी अधिक होना चाहिए। 

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