बिहार: राजगीर में नो प्लास्टिक जोन का असर, 55 पर्यटकों पर जुर्माना; विश्व शांति स्तूप परिसर में कचरा घटा
बिहार के राजगीर वन्यजीव अभयारण्य और विश्व शांति स्तूप परिसर को स्वच्छ रखने के लिए वन विभाग की ओर से 2 अक्टूबर से लागू किए गए ‘नो प्लास्टिक जोन’ अभियान का असर दिखने लगा है। अभियान के पहले सप्ताह में पर्यटक मार्गों और स्तूप परिसर में प्लास्टिक कचरे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले 55 पर्यटकों पर जुर्माना लगाया गया है।
विस्तार
राजगीर वन्यजीव अभयारण्य और ऐतिहासिक विश्व शांति स्तूप परिसर को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए वन विभाग की ओर से शुरू किए गए ‘नो प्लास्टिक जोन’ अभियान का असर दिखने लगा है। 2 अक्टूबर से लागू इस व्यवस्था के पहले सप्ताह में पर्यटक मार्गों और स्तूप परिसर में प्लास्टिक कचरे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले अब तक 55 पर्यटकों पर जुर्माना लगाया जा चुका है। वन विभाग ने अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाले पर्यटन के व्यस्त मौसम में पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए यह कदम उठाया है।
ग्रिधकूट भवन से विश्व शांति स्तूप तक नो प्लास्टिक जोन
पर्यटन के व्यस्त मौसम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक राजगीर पहुंचते हैं। इसे देखते हुए ग्रिधकूट भवन से लेकर रोपवे पार्किंग, रोपवे और पैदल मार्ग होते हुए विश्व शांति स्तूप परिसर तक के पूरे क्षेत्र को ‘नो प्लास्टिक जोन’ घोषित किया गया है।
इस क्षेत्र में एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। स्थानीय दुकानदारों को पहले से मौजूद प्लास्टिक उत्पादों का स्टॉक खत्म करने के लिए कुछ समय दिया गया है, लेकिन नया स्टॉक मंगाने पर रोक लगा दी गई है।
पानी की बोतल पर 50 रुपये जमा करने होंगे
प्लास्टिक की पानी की बोतलों से फैलने वाली गंदगी को रोकने के लिए वन विभाग ने वापसी योग्य जमा राशि की व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत पर्यटक यदि प्लास्टिक की पानी की बोतल लेकर परिसर में जाना चाहते हैं, तो उन्हें प्रवेश द्वार पर प्रति बोतल 50 रुपये जमा करने होंगे। इसके बाद बोतल पर पहचान टैग लगाया जाएगा। वापसी के समय टैग लगी बोतल दिखाने पर पर्यटकों को उनकी पूरी जमा राशि लौटा दी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य पर्यटकों को बोतलें इधर-उधर फेंकने से रोकना और परिसर में प्लास्टिक कचरे को कम करना है।
मुफ्त पेयजल की व्यवस्था, दोबारा इस्तेमाल होने वाली बोतल लाने की अपील
पर्यटकों को परेशानी न हो, इसके लिए रोपवे भवन और विश्व शांति स्तूप परिसर में आरओ आधारित मुफ्त पेयजल केंद्र बनाए गए हैं। वन विभाग पर्यटकों को अपने साथ थर्मस या बार-बार इस्तेमाल की जा सकने वाली पानी की बोतल लाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। जिन पर्यटकों के पास अपनी बोतल नहीं है, उनके लिए भी उपयुक्त विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा, 10 और 20 लीटर की क्षमता वाले नलयुक्त पानी के कैन को भी अनुमति दी गई है। प्रवेश द्वार पर उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से लगातार पर्यटकों को नो प्लास्टिक जोन के नियमों की जानकारी दी जा रही है।
प्राकृतिक और धार्मिक धरोहर को स्वच्छ रखने की अपील
वन विभाग ने पर्यटकों, स्थानीय दुकानदारों और वाहन चालकों से अभियान में सहयोग करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि सभी के सहयोग से राजगीर की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक धरोहर को स्वच्छ एवं हरित बनाए रखा जा सकता है। नो प्लास्टिक जोन के नियमों का पालन करने से क्षेत्र में प्रदूषण कम करने और पर्यावरण की सुरक्षा में मदद मिलेगी।