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Bihar News : उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में बड़ी टूट के संकेत, डिनर पार्टी से गायब रहे चार में से तीन विधायक
Thu, 25 Dec 2025 07:06 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Thu, 25 Dec 2025 07:06 PM IST
सार
Bihar : क्या पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा पर बिखराव का खतरा मंडरा रहा है? यह सवाल इसलिए क्यों कि सोशल मीडिया पर यह सवाल फिलहाल ट्रेंड कर रहा है। सूबे की सियासत में इसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
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नितिन नवीन के साथ कुशवाहा के विधायक।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के आश्चर्यजनक नतीजों के बाद सरकार तो बन गई, लेकिन पूरी तरह स्थिर नहीं हुई। जहां एक ओर जीतन राम मांझी राज्य सभा जाने के लिए एनडीए पर दवाब बना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा पर बिखराव का खतरा मंडरा रहा है। बुधवार की रात उपेन्द्र कुशवाहा ने लिट्टी चोखा की पार्टी आयोजित की, जिसमें ढ़ेर सारे लोग शामिल हुए। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि उस लिट्टी चोखा पार्टी में उनके चार विधायकों में से तीन विधायक नदारद रहे। सूबे की सियासत में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
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दिल्ली में मुलाकात और पटना में दूरी
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायकों में से तीन, माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह ने कुशवाहा की दावत से दूरी बनाए रखी। चौंकाने वाली बात यह है कि ये तीनों विधायक उस वक्त पटना में ही मौजूद थे। इससे पहले इन तीनों ने दिल्ली जाकर भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी और उन्हें बधाई दी थी।
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क्या हैं बगावत के मायने?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधायकों की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बढ़ती नजदीकी कुशवाहा के लिए खतरे की घंटी है। 2025 के चुनाव में उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा, भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरी थी। चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार या पार्टी के भीतर लिए जा रहे फैसलों को लेकर विधायक खुश नहीं हैं। नितिन नवीन से विधायकों की मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक पंडित इसे जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे छोटे दलों के भीतर भाजपा के बढ़ते प्रभाव के तौर पर देख रहे हैं।
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कुशवाहा की बढ़ी मुश्किलें
महज चार विधायकों वाली पार्टी में अगर तीन विधायक बागी रुख अपनाते हैं, तो तकनीकी रूप से दल-बदल कानून के तहत पार्टी के विलय या अलग गुट बनाने का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल, उपेंद्र कुशवाहा की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनके आवास पर हुई सन्नाटे वाली डिनर पार्टी ने बहुत कुछ बयां कर दिया है।
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दीपक प्रकाश की कुर्सी पर भी लटक सकता है तलवार
अब सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की राज्यसभा सदस्यता पर तो खतरा पैदा तो हो ही सकता है, लेकिन साथ ही साथ नीतीश कैबिनेट में आरएलएम कोटे से मंत्री बने दीपक प्रकाश की कुर्सी पर भी तलवार लटक सकता है। दीपक प्रकाश को विधान परिषद पहुंचने के लिए भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के समर्थन की सख्त जरूरत है। अगर गठबंधन के अंदर समीकरण बिगड़ते हैं या पार्टी में टूट होती है, तो उनका मंत्री पद भी खतरे में पड़ सकता है।