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1993 बम ब्लास्ट: वकील निकम का बड़ा खुलासा, बोले-संजय दत्त हथियारों के जखीरे की बात बता देते तो नहीं होता धमाका
Thu, 15 Oct 2026 09:06 PM IST
Abhishek Chendke
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Abhishek Chendke
Updated Thu, 15 Oct 2026 09:06 PM IST
सार
इंदौर में सार्थक संस्था के कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम शामिल हुए। उन्होंने 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट, अभिनेता संजय दत्त से जुड़े मामले और 26/11 आतंकी हमले सहित कई चर्चित प्रकरणों से जुड़े अनुभव साझा किए।
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अपनी बात रखते वकील उज्जवल निकम।
- फोटो : amarujala
विस्तार
राज्यसभा सदस्य और देश के कई चर्चित मामलों में पैरवी कर चुके वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम इंदौर में सार्थक संस्था के एक कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कोर्ट में लड़े गए चर्चित प्रकरणों के किस्से साझा किए। अभिनेता संजय दत्त को सजा दिलाने के मामले का जिक्र करते हुए निकम ने बताया कि जब उनसे पूछा गया कि क्या संजय दत्त वाकई बम ब्लास्ट मामले में शामिल थे, तो उन्होंने कहा कि संजय दत्त हमेशा यही कहते रहे कि उन्होंने सिर्फ एके-47 अपने पास रखी थी और उन्हें बम ब्लास्ट के बारे में जानकारी नहीं थी।
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निकम ने बताया कि कोर्ट में संजय दत्त को सजा दिलाने के लिए अभियोजन पक्ष ने यह तर्क रखा था कि ब्लास्ट से 30 दिन पहले जब अबू सलेम एक गाड़ी में हथियारों का जखीरा लेकर आया था, तब उनमें से एक हथियार संजय दत्त ने अपने पास रखा था। यदि इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों के मुंबई आने की जानकारी पुलिस को दे दी जाती, तो 1993 के बम ब्लास्ट को रोकने में मदद मिल सकती थी।
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मैं डॉक्टर बनना चाहता था
निकम ने बताया कि वे जलगांव के रहने वाले हैं। उनके पिता वकील थे और वे उन्हें भी वकील बनाना चाहते थे, लेकिन निकम डॉक्टर बनना चाहते थे। उन्होंने पिता की इच्छा का सम्मान किया और वकालत का पेशा अपनाया। उस समय जलगांव में अपराध की घटनाएं काफी होती थीं। वे चाहते थे कि अपराधियों में कानून का खौफ रहे, इसलिए उन्होंने लोक अभियोजक बनने का फैसला किया।
उन्होंने बताया कि 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट का मुकदमा उन्हें सौंपा गया था। इतनी बड़ी आतंकी घटना के बावजूद उस समय पाकिस्तान से टकराव को लेकर देश में हिचकिचाहट थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। निकम ने कहा कि उन्होंने अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में काम किया और हमेशा ईमानदारी तथा स्पष्टवादिता बनाए रखी। उन्होंने आरोपियों के प्रति भी मानवीय दृष्टिकोण रखा।
26/11 हमले के समय गोवा में थे निकम
निकम ने बताया कि जब मुंबई में 26/11 का आतंकी हमला हुआ, तब वे गोवा में अपनी बेटी के रिसेप्शन में शामिल होने गए थे। रात में कोई फ्लाइट नहीं मिलने के कारण वे सुबह छह बजे की पहली फ्लाइट से मुंबई पहुंचे।
अबू सलेम द्वारा लिखी गई चिट्ठी के बारे में निकम ने बताया कि उसमें सलेम ने उनकी तारीफ की थी। निकम ने कहा कि जेल में उन्होंने सलेम से कहा था कि उसे आजीवन कारावास की सजा हुई है। जेल से छूटने के बाद अच्छा आदमी बनने की कोशिश करना। कार्यक्रम में संस्था के संयोजक दीपक जैन और टीनू ने अतिथियों का स्वागत किया और परिचय दिया। सांसद शंकर लालवानी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
