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Bihar: नव नालंदा महाविहार ने किया 11वीं 'धम्मयात्रा' का सफल आयोजन, 'बुद्धचारिका दिवस' घोषित करने का प्रस्ताव

Fri, 13 Dec 2024 09:08 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 13 Dec 2024 09:08 PM IST
सार

11th Dhamma Yatra: कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि यह मार्ग भगवान बुद्ध की कई यात्राओं और उपदेशों का साक्षी रहा है। इसलिए इस दिवस को 'बुद्धचारिका दिवस' घोषित करना एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उपयुक्त होगा।

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Bihar: Nava Nalanda Mahavihara successfully organized 11th Dhamma Yatra, proposed to declare Buddhacharika Day
11वीं 'धम्मयात्रा' में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नव नालंदा महाविहार ने शुक्रवार को जेठियन से राजगीर तक 11वीं 'धम्मयात्रा' का आयोजन किया। इस यात्रा का समापन वेणुवन, राजगीर में हुआ। आयोजन में भारत और विदेशों के बौद्ध धर्मावलंबियों और भिक्षुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसमें श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, अमेरिका, जापान, चीन और लाओस जैसे देशों के श्रद्धालु शामिल थे।

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धम्मयात्रा का ऐतिहासिक महत्व
जानकारी के मुताबिक, इस यात्रा का मार्ग भगवान बुद्ध की ऐतिहासिक पदचिन्हों पर आधारित है। बुद्ध ने सम्यक सम्बोधि प्राप्ति के बाद सारनाथ में धर्मचक्र प्रवर्तन के बाद मगधराज बिंबिसार से मिलने इसी पथ का अनुसरण किया था। बिंबिसार ने जेठियन (प्राचीन यष्ठिवन) में उनका स्वागत किया और राजगीर के वेणुवन उद्यान को भिक्षुसंघ को दान कर दिया।
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यात्रा का आयोजन और सहभागिता
नव नालंदा महाविहार ने इस यात्रा का आयोजन 2014 से हर वर्ष किया है। इस वर्ष की यात्रा में लगभग 1500 धम्म यात्री शामिल हुए। आयोजन में लाइट ऑफ बुद्ध धम्म फाउंडेशन इंडिया, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति, अंतरराष्ट्रीय बौद्धिस्ट कॉन्फिडेरेशन नई दिल्ली और बिहार सरकार के पर्यटन विभाग का सहयोग रहा।
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नालंदा महाविहार के कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह के नेतृत्व में यह यात्रा 15 किलोमीटर लंबी रही। इसमें शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्रों और भिक्षु-भिक्षुणियों के साथ-साथ अन्य देशों के बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
 
'बुद्धचारिका दिवस' का प्रस्ताव
इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि यह मार्ग भगवान बुद्ध की कई यात्राओं और उपदेशों का साक्षी रहा है। इसलिए इस दिवस को 'बुद्धचारिका दिवस' घोषित करना एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उपयुक्त होगा।

 
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में वागमों डिक्सी, डॉ. संघ प्रिय महाथेरो, डॉ. महाशेवता महारथ, भिक्षु खुनजंग डेचन, और भिक्षु अमफो जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। इसके अलावा नव नालंदा महाविहार के आचार्य, छात्र, शोधकर्ता और गैर शैक्षणिक कर्मचारी भी इस आयोजन का हिस्सा बने।

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