फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Patna News ›   bihar heritage development bodh gaya kesaria stupa mundeshwari temple archaeological survey lidar gpr tourism

Bihar: बिहार की विरासत को मिलेगी विश्व पहचान! मां मुंडेश्वरी से बोधगया तक बनेगा वर्ल्ड क्लास टूरिज्म सर्किट

Tue, 04 Aug 2026 08:05 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Tue, 04 Aug 2026 08:05 PM IST
सार

बिहार सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार, केसरिया स्तूप और कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर सहित प्रमुख पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन और समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं

विज्ञापन
bihar heritage development bodh gaya kesaria stupa mundeshwari temple archaeological survey lidar gpr tourism
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार की हजारों साल पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार, केसरिया स्तूप और कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर सहित राज्य के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन और समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। सरकार का लक्ष्य इन धरोहरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाना है।
विज्ञापन


वरिष्ठ पुरातत्वविदों ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान कैमूर जिले के मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों के विस्तृत सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मंदिर परिसर में बिखरे हजारों प्राचीन भग्नावशेषों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्स्थापन, संरक्षण और प्रलेखन किया जा सकता है। इससे पूरा क्षेत्र भारतीय पुरातात्विक धरोहर का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
विज्ञापन


मां मुंडेश्वरी मंदिर के संरक्षण पर बनेगी चरणबद्ध योजना

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुरूप मां मुंडेश्वरी मंदिर के भग्नावशेषों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने पूरे क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को विकसित करने पर भी जोर दिया, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अनुभव मिल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


बैठक में ये विशेषज्ञ रहे मौजूद

बैठक में पद्मश्री डॉ. के.के. मोहम्मद, प्रोफेसर डॉ. रजत सान्याल, प्रोफेसर अनिल कुमार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पटना के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. हरिओम शर्मा, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह तथा कला, संस्कृति एवं भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

कैमूर के पर्यटन स्थलों के विकास पर भी चर्चा

बैठक में कैमूर क्षेत्र के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ और अन्य प्राकृतिक एवं प्रागैतिहासिक महत्व के स्थलों के समग्र विकास की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि ये स्थल बनारस-कोलकाता एक्सप्रेसवे से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण भविष्य में यहां पर्यटकों की आवाजाही और आसान होगी।

हेरिटेज और इको टूरिज्म सर्किट के रूप में होगा विकास

विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक सौंदर्य, प्रागैतिहासिक महत्व और पुरातात्विक संभावनाओं से भरपूर कैमूर क्षेत्र को बिहार के नए हेरिटेज और इको टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि वैज्ञानिक संरक्षण और व्यवस्थित विकास के बाद इन स्थलों को भविष्य में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए भी प्रयास किए जाएं।

बोधगया में LiDAR और GPR तकनीक से होगा सर्वे

मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का अत्याधुनिक LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) और GPR (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) तकनीक से सर्वे कराने का निर्देश दिया। इन तकनीकों के माध्यम से बिना खुदाई किए जमीन के भीतर मौजूद संभावित पुरातात्विक संरचनाओं और अवशेषों की वैज्ञानिक पहचान की जा सकेगी। इससे भविष्य में होने वाला उत्खनन अधिक सटीक और प्रभावी होगा।

सुल्तानगंज और मंदार के संरक्षण पर भी रहेगा विशेष फोकस

बैठक में सुल्तानगंज और मंदार क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थलों के संरक्षण, समेकन और समग्र विकास पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इन स्थलों की ऐतिहासिक पहचान को व्यवस्थित रूप से संरक्षित किया जाए, ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिल सके।

केसरिया स्तूप का होगा वैज्ञानिक उत्खनन

मुख्यमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के शेष हिस्से का वैज्ञानिक उत्खनन कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अब तक इस विशाल स्तूप का केवल आंशिक उत्खनन हुआ है, जबकि इसके बड़े हिस्से में अब भी महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष होने की संभावना है। उन्होंने शेष क्षेत्र के वैज्ञानिक उत्खनन और संरक्षण की प्रक्रिया तेज करने का भी निर्देश दिया।


बिहार की छिपी धरोहरों को दुनिया के सामने लाने की तैयारी

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की धरती के नीचे अब भी अनेक महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरें सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पहचान, उत्खनन और संरक्षण के जरिए राज्य के इतिहास के कई नए अध्याय सामने आएंगे। इससे सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed