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बिहार: गंगा के बैकवाटर ने बढ़ाई सरमेरा की चिंता, बांधों पर टूटने का खतरा; 350 बीघा फसल दस फीट पानी में डूबी

Sat, 12 Sep 2026 07:57 AM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: पटना ब्यूरो Updated Sat, 12 Sep 2026 07:57 AM IST
सार

नालंदा के सरमेरा प्रखंड में गंगा के बैकवाटर से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। चार दिनों से लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण पेंदी, सदहा और पुरानी इसुआ के जमींदारी बांधों पर दबाव बढ़ गया है। करीब 350 बीघा धान और मक्के की फसल पानी में डूब चुकी है।

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Bihar Flood Crisis Ganga Backwaters Threaten Sarmera Embankments 350 Bighas of Crops Submerged
गंगा के बैकवाटर में भरा लबालब पानी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गंगा नदी के बैकवाटर के कारण नालंदा जिले के सरमेरा प्रखंड में बाढ़ के हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। चार दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि पानी घटने के बजाय लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर में हो रही इस बढ़ोतरी से पेंदी, सदहा और पुरानी इसुआ स्थित जमींदारी बांधों पर दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। बांध के एक छोर पर फैले खेत विशाल झील में बदल चुके हैं। ग्रामीणों में इस बात का खौफ है कि यदि बांध टूटा, तो बाढ़ का पानी सीधे बस्तियों में घुसेगा और बड़े पैमाने पर विस्थापन की नौबत आ जाएगी।
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दो फीट पानी और बढ़ा तो घरों में मचेगी तबाही
पेंदी गांव के मुहाने पर बसे कई घरों की दहलीज तक पानी चढ़ चुका है, जबकि निचले इलाकों के मकान टापू बन गए हैं। पानी के तेजी से फैलाव ने ग्रामीणों की रात की नींद छीन ली है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में महज दो फीट की बढ़ोतरी और हुई, तो बांध पर पानी चढ़ जाएगा और पूरा इलाका जलमग्न हो जाएगा।
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पट्टे पर लिए खेत डूबे, कर्ज में फंसे किसान
बाढ़ की इस मार ने बटाईदार और छोटे किसानों की कमर तोड़ दी है। संजय महतो, सुदामा महतो, शंकर महतो और युवराज कुमार जैसे कई किसानों ने महाजनों से कर्ज लेकर पट्टे पर खेत लिए थे। तीनों गांवों में लगभग 350 बीघे में लगी धान और मक्के की खड़ी फसल 8 से 10 फीट गहरे पानी में समा चुकी है। किसानों का कहना है कि खरीफ की फसल बर्बाद हो चुकी है; यदि सरकार ने त्वरित मुआवजा नहीं दिया, तो आने वाले रबी सीजन में बुआई करना और परिवार का भरण-पोषण करना असंभव हो जाएगा।
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मोटर बोट तैनात, बालू की बोरियों से बांध की मरम्मत
गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। अंचलाधिकारी अनुधारा कुमारी ने बताया कि जलमग्न इलाकों में आवागमन और राहत कार्य के लिए मोटर बोट तैनात कर दी गई हैं। साथ ही जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया गया है कि कमजोर बांधों और कटाव संभावित स्थानों पर युद्धस्तर पर बालू भरी बोरियां रखकर मरम्मत की जाए। प्रशासन ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचित करने की अपील की है।
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