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लवगुरु मटुकनाथ हुए रिटायर, कहा- अभी तो मैं लरिका हूं
Wed, 31 Oct 2018 02:40 PM IST
Riya Kumari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Riya Kumari
Updated Wed, 31 Oct 2018 02:40 PM IST
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मटुकनाथ
- फोटो : matuknath facebook profile
जूली के साथ जब उनके इश्क के चर्चे उठे थे तो वह लवगुरू कहलाए। लवगुरु प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी। पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मटुकनाथ रिटायर हो रहे हैं। रिटायर होने से पहले मटुक नाथ ने एक फेसबुक पोस्ट भी लिखा है, जिसमें उन्होंने अपने दिल के उदगार को खूब बयां किया है। मटुक ने अपने लंबे चौड़े फेसबुक पोस्ट में खुद को लरिका यानि बच्चा बताया है। वह लिखते हैं मैं 65 वर्ष का लरिका हूं। मेरी जवानी ने अभी अंगड़ाई ली है। मेरे अंग-अंग से यौवन की उमंग छलक रही है! जब मैं मस्त होकर तेज चलता हूं तो लोग नजर लगाते हैं! दौड़ता हूं तो दांतों तले उंगली दबाते हैं...
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लवगुरु प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी अपनी एक छात्रा जूली से इश्क को लेकर खूब चर्चा बटोरी थी। पटना विश्वविद्यालय ने 15 जुलाई, 2006 को मटुकनाथ को बीएन कॉलेज के हिंदी विभाग के रीडर पद से निलम्बित कर दिया था। बाद में 20 जुलाई, 2009 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उन पर अपनी कक्षा में बाहरी लोगों को बैठाने व अमर्यादित आचरण करने का आरोप लगाया गया था। इसके दो साल बाद मटुकनाथ की बर्खास्तगी को रद्द कर उन्हें वापस नौकरी पर रखा गया था। पिछले दिनों जूली उन्हें भी छोड़ कर जा चुकी हैं। मटुकनाथ ने लिखा है आज से मेरा स्वाधीनता दिवस शुरू हो रहा है।
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क्या लिखा है पोस्ट में
आज मेरा रिटायरमेंट डे है । वास्तव में यह मेरा स्वाधीनता दिवस है ! व्यर्थ के कार्यों से मुक्ति मिलने का आनंद मेरी रगों में दौड़ रहा है ! विश्वविद्यालय के क्लास बकवास हैं ! विद्यार्थियों की प्रतिभा कुंद करने के सिवा वहां कोई रचनात्मक काम संभव नहीं ! खुशी इस बात की है कि इस हिंसात्मक शिक्षा में जुटे रहने की बाध्यता से मुक्ति मिल रही है। अब मैं जिस दिशा में कदम रखूंगा, वह वास्तविक शिक्षा होगी।
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किंतु, मैं कोई योजना बनाकर उसे पूरा करने के तनाव में नहीं पड़ूंगा । मन की तरंग पर सवार होकर उड़ूंगा। अस्तित्व जो करवाना चाहेगा, उसी की इच्छा में अपनी इच्छा को लय करूंगा। आत्म-सुख मेरी प्राथमिकता होगी । मेरी समझ है कि केवल सुखी व्यक्ति दूसरों को सुख पहुंचाने में सहायक हो सकता है । समाज, देश और दुनिया को बदलने का नारा विशुद्ध धोखा है।