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इस मस्जिद ने खोले महिलाओं के लिए अपने दरवाजे, रमजान में होंगे खास इंतजाम

Sun, 28 Apr 2019 12:38 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 28 Apr 2019 12:38 PM IST
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Patna mosque will open its doors for women in Ramzan, already begun preparation
मस्जिद (फाइल फोटो)

पहली बार पटना में रहने वाली महिलाएं तरावीह की दुआ में हिस्सा ले सकेंगी। यह एक विशेष प्रकार की प्रार्थना होती है जो रमजान के पवित्र महीने में मस्जिद के अंदर की जाती है। पटना शहर के मितान घाट में स्थित खानक्वाह मुनीमिया और मस्जिद जिसे कि सूफी सेंटर के लिए जाना जाता है उसने फैसला लिया है कि महिलाओं को मस्जिद के अंदर दुआ करने दी जाए और इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है।

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छह मई में रमजान शुरू हो रहे हैं। मितान घाट मस्जिद में महिला नमाजियों के लिए न केवल प्रार्थना के लिए विशिष्ट स्थान होगा बल्कि वह वहां कुरान पढ़ सकेंगी। इसके अलावा उन्हें एक हाफिज भी मुहैया करवाया जाएगा जो कुरान के विशेषज्ञ होते हैं। मस्जिद अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं को वजू के लिए विशेष स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा।
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वजू औपचारिक प्रार्थना से पहले एक तरह का कर्मकांड शुद्धिकरण होता है जिसे इस्लाम में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मस्जिद बिहार की राजधानी में स्थित मस्जिदों से कई मायनों में अलग है। इसमें सूफी संतों और विद्वानों की कब्रें शामिल हैं। जिसमें मुल्ला मितान और हजरत मखदूम मुनेम पाक शामिल हैं।
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खानक्वाह सूफीवाद की पांडुलिपियों और पुस्तकों के अपने विशाल संग्रह के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय है। जिसकी वजह से विभिन्न धर्मों और आस्था के लोगों की एक बड़ी संख्या यहां आती है। मस्जिद में भी बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम भक्त आते हैं। 

खानक्वाह के प्रशासनिक प्रमुख हजरत सैयद शाह शमिमुद्दीन अहमद मुनेमी सज्जाद नशीन ने कहा, 'आने वाले महीनों में यह खानक्वाह सूफीवाद पर एक विश्वविद्यालय में बदल जाएगा। हमारी योजना है कि समुदायों के बीच सद्भाव को बढ़ावा दिया जाए और सूफी अध्ययन केंद्र के जरिए इस देश की साझा संस्कृति को उजागर करें। ठीक इसी समय हम अपने समुदाय की महिलाओं की इच्छा और आकांक्षाओं से भी परिचित हैं और चाहते हैं कि उन्हें महसूस हो कि इस्लाम उनके लिए क्या है।'


मुनेमी ने कहा कि सदस्यों के साथ कुछ विचार-विमर्श और चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया कि महिलाओं के लिए तरावीह की दुआ के लिए मस्जिद में विशेष इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा, 'हम इस सुविधा को मस्जिद की पहली मंजिल पर करने की योजना बना रहे हैं। जबकि भूतल पुरुषों को समर्पित किया जाएगा।'

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