पासवान परिवार को ही मिलेंगे LJP के 25 फीसद टिकट
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बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान कम से कम आधा दर्जन से भी अधिक टिकट अपने पारिवारिक सदस्यों और रिश्तेदारों में बांटने को बाध्य होंगे। पार्टी की बिहार इकाई के तमाम महत्वपूर्ण पदों पर पहले से जमे पासवान के रिश्तेदार चुनाव में टिकट के स्वाभाविक दावेदार बन गए हैं।
उन पर अपने भतीजे, दामाद, समधी, ममेरे भाई और रिश्ते में दूर की बहू को टिकट देने का दबाव है। इनमें से पासवान के सांसद भाई रामचंद्र पासवान के पुत्र प्रिंस राज, दामाद मृणाल पासवान और अनिल साधु का टिकट पहले से ही तय भी हो चुका है। जबकि आधा दर्जन अन्य रिश्तेदारों का टिकट भी पक्का माना जा रहा है।
गौरतलब है कि इस समय खुद पासवान, उनके पुत्र चिराग पासवान और भाई रामचंद्र पासवान सांसद हैं। एक भाई पशुपति कुमार पारस बिहार इकाई के अध्यक्ष हैं। एक दामाद मृणाल पार्टी की बिहार इकाई के उपाध्यक्ष हैं तो दूसरे दामाद अनिल पार्टी से जुड़े संगठन दलित सेना की बिहार इकाई के अध्यक्ष हैं।
पासवान अपने ममेरे भाई महेश्वर हजारी को वर्ष 2005 में तो समधी पुनीत राय को विधायक बनवा चुके हैं। हालांकि ममेरे भाई हजारी ने विधायक बनने के बाद अपनी अलग राह चुन ली थी।
मांझी साध चुके हैं पासवान पर निशाना
राजग में सीट बंटवारे के पूर्व जब लोजपा और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) में तीखी जुबानी जंग शुरू हुई थी, तब हम के मुखिया जीतन नाम मांझी ने पासवान को अपने ही परिवार का नेता करार दे कर व्यंग्य किया था।
अब लोजपा को बंटवारे में 40 सीटें मिली हैं और माना जा रहा है कि इनमें से 25 फीसदी टिकट पासवान परिवार में ही बंटेगा।
दरअसल पासवान परिवार के दूर और नजदीक के करीब 15 नेताओं ने टिकट पर अपनी दावेदारी जताई है। चूंकि इनमें से कई पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण पद पर हैं, इसलिए माना जा रहा है कि पासवान इनमें से ज्यादातर नेताओं की दावेदारी को टाल नहीं पाएंगे।
फिलहाल पासवान के भतीजे और दोनों दामादों के साथ ही एक दूर केरिश्ते की बहू सरिता पासवान का टिकट पक्का है। हालांकि सरिता के साथ-साथ पासवान के दोनों दामाद वर्ष 2010 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। जहां तक पासवान के भतीजे प्रिंस की बात है तो इस चुनाव के जरिये वह चुनावी सियासत में कदम रखेंगे।