फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   one city in india where women are driving auto

नीतीश के बिहार में महिलाएं कर रहीं अनोखा काम

Sat, 04 Jan 2014 12:52 PM IST
Updated Sat, 04 Jan 2014 12:52 PM IST
विज्ञापन
one city in india where women are driving auto

विज्ञापन

भारत के दूसरे शहरों की तरह पटना में भी अब महिलाएं ऑटो रिक्शा की ड्राइविंग सीट पर बैठकर पूरे आत्मविश्वास से ऑटो चलाती दिखाई देती हैं।

अभी पटना में फिलहाल आठ महिलाएं पटना जंक्शन और हवाई अड्डे के प्री-पेड ऑटो स्टैंड से यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रही हैं।

इन्होंने सबसे पहले पटना जंक्शन पर 2013 में 18 अगस्त को ऑटो की स्टीयरिंग संभाली थी।

ऑटो का सफर

one city in india where women are driving auto

पिछले साल ही एक सितंबर को पटना हवाई अड्डे से भी महिलाओं ने ऑटो चलाना शुरू किया। हालांकि हवाई अड्डे पर शुरुआत में कुछ दिन के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ने रोक लगाई थी, पर बाद में वहां फिर से महिलाओं को ऑटो चलाने की अनुमति मिल गई।

बिहार में महिलाओं के सशक्तीकरण के इस नए तरीके को ढूंढने से लेकर अंजाम देने तक का पूरा श्रेय पटना जिला ऑटो रिक्शा चालक संघ को है।

संघ के पदाधिकारी जब पिछले साल अप्रैल में केरल गए, तो वहां महिला ऑटो चालकों को देखकर उन्होंने बिहार में भी ऐसी ही पहल करने की सोची।

संघ अब तक पचास महिलाओं को तीन महीने की ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षित कर चुका है। इन्हें मार्शल आर्ट की भी ट्रेनिंग दी गई है। संघ के अनुसार पहले चरण की सफलता के बाद अब बहुत सारी महिलाएं ऑटो चलाने की ट्रेनिंग चाहती हैं।

ट्रेनिंग से लेकर अब तक इन महिलाओं की सफलता की कहानियों को अखबारों और समाचार चैनलों में नियमित रूप से जगह मिल रही है और एक टेली फिल्म भी बन चुकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रामप्यारी, धन्नो, स्कूटी

one city in india where women are driving auto

ऑटो चालक अनीता देवी के अनुसार वे और उनकी सहेलियां जल्द ही कलर्स चैनल के 'इंडियाज गॉट टैलेंट' कार्यक्रम में भी दिखाई देंगी। यही नहीं, एक लाइफ स्टाइल चैनल ने 'नौ देवियां' कार्यक्रम के एंकर के रूप में ऑटो चालक गुडिया सिन्हा का चयन किया है। यह कार्यक्रम गुडिया जैसी महिलाओं पर ही केंद्रित है।

इन महिला ऑटो चालकों की सरकार से मांग है कि वह उनके जैसी महिलाओं को बढावा देने के लिए मुफ्त या कम-से-कम सब्सिडी पर ऑटो देने का काम करे।

इन महिलाओं ने अपने ऑटो को अलग-अलग नाम दिए हैं। अपने ऑटो को कोई रामप्यारी, कोई स्कूटी तो कोई धन्नो के नाम से इन्हें पुकारता है।

इनमें से एक रिंकी तो कभी-कभी सब्जी लाने जैसे घर के दूसरे कामों के लिए भी ऑटो को स्कूटी की तरह काम में लाती हैं।

विज्ञापन

बदलाव की कहानी

one city in india where women are driving auto

ऑटो चलाते हुए ये महिलाएं न सिर्फ अपने पैरों पर खडी हुईं, बल्कि पुरुषों द्वारा स्थापित गलत मान्यताओं को भी खारिज कर रही हैं।

सुष्मिता कुमारी कहती हैं कि पहले उनके पति, जो खुद भी पेशे से ऑटो ड्राइवर हैं, काम के दौरान और उसके बाद थकान मिटाने के लिए तंबाकू से लेकर शराब तक के नशे को जरूरी बताते थे और वह चाह कर भी रोक नहीं पाती थीं।

अब वह काम से लौटने के बाद पलटकर पति से पूछती हैं कि मैं तो नशा नहीं करती तो फिर मेरी थकान कैसे दूर हो जाती है?

जाहिर है इन ऑटो चालकों ने महिलाओं के लिए न सिर्फ एक नए रोजगार का दरवाजा खोला है बल्कि इन्होंने समाज को भी झकझोरने का काम किया है।

ये महिलाएं घर और घर के बाहर, दोनों जगह पर वक्त के कागज पर बदलाव की कहानियां लिख रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed