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Sawan Somwar 2023: सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर में पहली सोमवारी को उमड़े श्रद्धालु; नए जोडों ने भोले से की कामना
Mon, 10 Jul 2023 01:39 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्वी चंपारण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्वी चंपारण
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Mon, 10 Jul 2023 01:39 PM IST
सार
Sawan Somwar 2023: बाबा सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर अरेराज में सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। यहां कांवड़ियों के अलावा शादी के बाद नए जोड़े भी सावन के पहले सोमवार को मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भोले बाबा से अपने सफल वैवाहिक जीवन की कामना की।
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सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर में भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Sawan Somwar 2023: उत्तर बिहार में बाबा सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर अरेराज में सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है। इसको लेकर प्रशासन और मंदिर के प्रशासन द्वारा भक्तों के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। ताकि किसी को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। इसको लेकर मंदिर और जिला प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किया जाता है। जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई गई है। साथ ही सीसीटीवी कैमरे से सुरक्षा के लिए निगरानी रखी जा रही है। जल चढ़ाने आए कांवड़ियों के लिए विशेष रहने पेयजल सहित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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मंदिर के महंत स्वामी रविशंकर गिरि ने बताया कि सात फुट गहरे में बसे पंचमुखी बाबा सोमेश्वरनाथ महादेव मंदिर जो प्राचीनतम तीर्थ स्थल है। ऐसी मान्यता है कि जब पांडव वनवास भेजे गए तब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से प्रार्थना की कि राज्य लक्ष्मी और राज्य सत्ता पुनः कैसे प्राप्त होगी। इस पर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें परामर्श दिया कि अज्ञातवास के दौरान जब आप विराटनगर की यात्रा पर जाएंगे तो मार्ग में अरण्यराज मिलेगा। वहां भगवान सोम द्वारा स्थापित सोमेश्वर महादेव का शिवलिंग है। महारानी द्रौपदी और अनुज द्वारा सावन भर प्रवास कर कमल पुष्पों से श्रृंगार और पूजन करेंगे। तब आपको राज्य लक्ष्मी के साथ राज्य सत्ता की प्राप्ति होगी। धर्मराज ने वैसा ही किया। कालांतर में उन्हें सब प्राप्त हुआ।
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सोमेश्वर नाथ महादेव मंदिर पवित्र स्थल के रूप में विख्यात है। ऐसी मान्यता है कि यहां जिसने भी सच्चे दिल से जो मांगा, वह भोले नाथ ने पूरा किया है। यहां न केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि दूसरे धर्मावलंबी भी संतान की कामना को लेकर जलाभिषेक कर महाश्रृंगार का दर्शन करते हैं। शादी के बाद सावन के पहले सोमवार को नए जोड़े मंदिर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भोले बाबा से अपने वैवाहिक जीवन के सफल होने की कामना की।
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