नीतीश कुमार की शराबबंदी देसी शराब तक सीमित?
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश में अपने शराबबंदी के ऐलान से यू-टर्न लेते हुए इसे देसी शराब तक सीमित कर दिया है।
बिहार सरकार के नए फैसले के अनुसार प्रदेश में शराबबंदी सिर्फ देशी शराब पर एक अप्रैल 2016 से लागू होगी जबकि अंग्रेजी शराब की बंदी नहीं होगी। हालांकि इसे हतोत्साहित करने के लिए सरकार इस पर ड्यूटी बढ़ा देगी ताकि लोग इसे खरीदने से बचें। लेकिन बिहार के आबकारी एवं मद्य निषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का कुछ और ही कहना है, उन्होंने कहा प्रदेश में सभी तरह की शराब पर बैन लगेगा।
सरकार इसे मौत मानती है, तो क्या सरकार मौत बेचेगी? साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार अच्छे काम करने के लिए है, शराब बेचने के लिए नहीं।
कई प्रदेश लगा चुके हैं शराब पर बैन
गौरतलब है कि 26 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान किया था कि 1 अप्रैल 2016 से प्रदेश में शराब ब्रिकी पर बैन लग जाएगा। नीतीश ने ये ऐलान एक प्रतिज्ञा के तौर पर किया था।
उल्लेखनीय है कि नीतीश ने इस मुद्दे को चुनावी सभाओं में महत्वपूर्ण ढंग से ठाया था और उठाया था। उन्होंने कहा था कि अगर उनकी सरकार बनती है तो वह शराब को पूरी तरह बंद कर देंगे। देश में शराब बंदी की मांग बड़े पैमाने पर होती रही है। नवंबर के पहले हफ्ते में राजस्थान में शराबबंदी की मांग करते हुए पर बैठे पूर्व एमएलए गुरचरन छाबड़ा की मौत हो गयी थी।
वहीं गुजरात, नगालैंड और मणिपुर के कुछ हिस्सों के साथ लक्षद्वीप ने शराब पर पूर्ण रूप से बैन लगा दिया है, जबकि केरल 2014 से सिलसिलेवार तरीके से शराब पर बैन लगा रहा है।