बिहारः 50 लाख लोग मोदी को भेजेंगे अपना 'डीएनए'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिहार चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी की बढ़ती सक्रियता की काट करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब उनके ही बयानों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
मोदी के नीतीश के डीएनए वाले बयान को बिहार की अस्मिता से जोड़ते हुए नीतीश ने इसे भावनात्मक मुद्दा बनाने की तैयारी कर ली है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री के इस बयान के खिलाफ बिहार में शब्द वापसी अभियान छेड़ने की घोषणा कर दी है। अभियान के दौरान वे प्रधानमंत्री मोदी से अपने बयान वापस लेने की मांग करते हुए बिहार के 50 लाख लोगों का डीएनए प्रधानमंत्री मोदी को भेजेंगे।
इस दौरान मोदी के बयानों के विरोध में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा। खास बात ये है कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को ट्विटर सरकार बताते हुए नीतीश ने इस अभियान की घोषणा भी ट्विटर पर ही की।
ट्विटर सरकार पर ट्विटर से साधा मोदी पर निशाना
सोमवार सुबह एक के बाद एक ट्वीट की झड़ी लगाते हए नीतीश ने कहा कि, 'DNA पर मोदीजी का वक्तव्य बिहार और बिहार के लोगों का अपमान हैं। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरी है, अब इस विषय का फैसला जनता की अदालत में होगा।'
नीतीश आगे लिखते हैं, 'शब्दवापसी के इस महाअभियान में कम से कम 50 लाख बिहार के लोग हस्ताक्षर अभियान से जुड़ेंगे और DNA टेस्ट्स के लिए अपना सैंपल भी मोदीजी को भेजेंगे'। 'इस महीने के 29 तारीख को पटना के गांधी मैदान में “स्वाभिमान रैली” के साथ इस अभियान के पहले चरण को पूरा किया जाएगा।'
'सितम्बर में अभियान के दूसरे चरण में शब्द वापसी हेतु हस्ताक्षर और DNA सैंपल भेजने के इस अभियान को हम बिहार के कोने-कोने में हर घर तक ले जाएंगे और साथ ही राज्य के 4 से 5 क्षेत्रों में स्वाभिमान रैलियां भी आयोजित करेंगे।'
'नीतीश के अनुसार, 'DNAके अपने वक्तव्य को वापिस न लेने की मोदीजी की हठधर्मिता और फिर कल गया रैली में बिहार को बीमारू और लोगों को दुर्भाग्यशाली बताना क्षोभनीय है, हमारा यह विश्वास है कि बिहार और बिहार की जनता को अपमानित करने वालों को यहां की जनता माकूल जवाब देगी।'
'डीएनए' को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में नीतीश
नरेन्द्र मोदी की रैली में जुटी भारी भीड़ और चुनाव पूर्व आए सर्वेक्षणों ने नीतीश कुमार को इसके लिए तो आगाह कर ही दिया है कि बिहार की लड़ाई उनके लिए आसान नहीं होने जा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी पर सटीक वार करने के लिए नीतीश ने उनके बयानों को ही अपना हथियार बना लिया है।
यही कारण है कि बिहार में हुई लगातार दूसरी रैली में प्रधानमंत्री मोदी जो भी दावे और घोषणाएं करते हैं नीतीश शाम होते होते पूरे आंकडों और चिट्ठों के साथ उसकी काट के लिए तैयार हो जाते हैं। खासकर पिछली रैली में उनके डीएनए वाले बयान को नीतीश कुमार लातार गर्माए हुए हैं।
राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी नीतीश जानते हैं कि चुनावों में भावनाओं का बड़ा महत्व होता है इसलिए अगर वो मोदी के डीएनए वाले बयान को बिहार की जनता की अस्मिता से जोड़ने में सफल रहे तो इसका फायदा चुनावों में भी उन्हें जरूर मिलेगा। क्योंकि लोकसभा चुनावों से पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई 'चाय वाले' की टिप्पणी का किस तरह अपने पक्ष में इस्तेमाल किया था।
इसलिए वह प्रधानमंत्री द्वारा बिहार के संबंध में दिए गए हर बयान को भावनात्मक मुद्दा बनाने में जुटे हुए हैं। चाहे वो बीमारू राज्य वाला बयान हो या जंगलराज की वापसी का। दूसरे, मोदी के डीएनए वाले बयान के सहारे वे बिहार की जनता तक पहुंच बनाने की उम्मीद भी कर रहे हैं।
क्योंकि 50 लाख लोगों का संदेश अगर वे मोदी तक पहुंचाने में सफल रहे तो साफ है कि वह बिहार की एक बड़ी आबादी तक अपनी पकड़ भी बना लेंगे।