'मांझी ने बिहार गुड गवर्नेंस को चौपट कर दिया'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) नेता नीतीश कुमार का कहना है राज्यपाल को जीतन राम मांझी को ही बहुमत हासिल करने के लिए पहले बुलाना चाहिए था। मगर यह सब तय सीमा के अंदर करवाना चाहिए था। नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति के सामने अपनी पार्टी और दूसरे दलों जैसे राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और सीपीआई के विधायकों की परेड कराई।
उन्होंने कहा, "अगर राज्यपाल अभी की सरकार को सदन में बहुमत साबित करने का मौका देना चाहते हैं, तो वह ऐसा मौका दें। मगर, उसकी एक सीमा निर्धारित होनी चाहिए। न्यूनतम समय दिया जाना चाहिए। सदन की बैठक 24 घंटों में या 48 घंटों में बुलाई जा सकती है। मगर राजभवन ने बिल्कुल चुप्पी साध रखी है। हमने दो दिन पहले सरकार बनाने का दावा पेश किया मगर अभी तक कोई जवाब नहीं आया।"
मांझी के दावे को नीतीश की चुनौती
नीतीश का कहना था कि बिहार के मौजूदा राजनीतिक हालात पर राजभवन की ओर से किए जा रहे विलंब की वजह से 'विधायकों की खरीद फरोख्त को बढ़ावा मिलेगा जो लोकतंत्र के हित में नहीं होगा। नीतीश ने बातचीत के दौरान बागी हो गए मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के उस दावे को भी चुनौती दी कि मांझी को 140 विधायकों का समर्थन हासिल है।
उनका कहना है," किस पार्टी के विधायक उनके साथ हैं? जब जद (यू), राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक नई सरकार बनाना चाहते हैं तो फिर मांझी बताएं वह किसे साथ लेकर सरकार बनाना चाहते हैं?
"नीतीश कुमार का कहना है कि संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल क़ानून के तहत मांझी को अपने दल के दो तिहाई विधायकों का समर्थन हासिल होना चाहिए जो उनके पास नहीं है। उनका आरोप है कि मांझी जो कुछ कर रहे हैं वो भारतीय जनता पार्टी की शह पर कर रहे हैं।
मांझी को चाहिए था अच्छा शासन चलाते
यह पूछे जाने पर कि उनको जद(यू) विधायक दल का नेता चुना जाना ही विवादों में आ गया है, तो नीतीश कुमार का कहना था, "उनके कहने से क्या होता है। सारे विधायक एक तरफ हैं जो अपना नेता चुन सकते हैं। बिहार में सिर्फ गिनी चुनी पार्टियां हैं। सिर्फ भारतीय जनता पार्टी एक तरफ है। मांझी साहब किस पार्टी के समर्थन के साथ सरकार बनाना चाहते हैं?"
जब पूछा गया कि एक महादलित को उन्होंने मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया और अचानक अब उन्हें हटाना चाहते हैं तो क्या यह जातिवाद की राजनीति का सूचक नहीं है, नीतीश कुमार का कहना था कि उन्होंने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाते हुए कभी उनकी जाति के बारे में टिप्पणी नहीं की थी। "आप उस समय के टीवी फुटेज देख लीजिए। मैंने ऐसा कभी नहीं कहा था। यह सब बकवास है।"
मगर उनके खिलाफ हो रहे विरोधों के बारे में चर्चा करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि कोई भी पांच लोगों को किसी के खिलाफ नारे लगवाने के लिए खड़ा कर सकता है। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी को जो मौका मिला उसे उन्हें अच्छा शासन चलाकर यादगार बनाना चाहिए था। "अब तो 'गुड गवर्नेंस' को ही उन्होंने चौपट कर दिया।"