विधानसभा चुनाव भी साथ लड़ेंगे नीतीश और लालू!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संकट में सांप और चूहे की एक ही नाव पर सवारी संबंधी कहावत बिहार की राजनीति में चरितार्थ होती दिख रही है। आम चुनाव में मोदी लहर में करीब-करीब सूपड़ा साफ हो जाने के बाद भावी संकट को भांपते हुए राज्य में एक दूसरे के विरोध की राजनीति करने वाले दो दिग्गजों नीतीश कुमार और लालू प्रसाद ने हाथ मिला लिए हैं।
इसे जदयू अध्यक्ष शरद यादव की मोदी के विरोध में राज्य में पुराने समाजवादियों को एकजुट करने की मुहिम की ठोस शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि ये दोनों दल अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ने की योजना पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद लालू ने फिलहाल इससे इनकार किया है।
राबड़ी जा सकती हैं राज्यसभा
राजद की नीतीश के इस्तीफे के बाद गठित मांझी सरकार को समर्थन से शुरू हुई नई दोस्ती को मजबूती देने के लिए दोनों दल राज्यसभा उपचुनाव में भी हाथ मिला सकते हैं। खासतौर पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की योजना इस नई दोस्ती के सहारे अपनी पत्नी राबड़ी देवी को राज्यसभा भेजने की है।
राज्य में जल्द ही राज्यसभा की तीन सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव जीतने के कारण राज्यसभा के सदस्य राजीव प्रताप रूडी, रामकृपाल यादव और रामविलास पासवान को इस्तीफा देना होगा। उपचुनाव में अगर भाजपा विरोधी दलों ने हाथ मिलाया तो उन्हें दो सीटें हासिल हो सकती हैं।
नीतीश भी जाएंगे राज्यसभा!
माना जा रहा है कि जदयू इनमें से एक सीट राजद को नई दोस्ती के तोहफे के रूप में देगा। जबकि दूसरी सीट से खुद नीतीश या शरद या जदयू का कोई अन्य उम्मीदवार उच्च सदन पहुंचेगा। कुछ जानकार इस समझौते को एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत बता रहे हैं तो कुछ इसे चुनाव में भाजपा के साथ गए सवर्ण वोटों के खिलाफ जदयू-राजद की महज मिश्रित लामबंदी मानते हैं।
पुराने जनता दल के नेताओं के बीच समझौते पर लालू का कहना है कि समन्वय की जिम्मेदारी सबकी है। मंडल वालों पर हमला हो रहा है, ऐसे में एकजुटता समय की मांग है। वैसे हमारा सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषक अनंत कुमार का कहना है कि यह राजनीति बिहार से ही शुरू हो सकती है।
लालू के पड़ोसी होंगे नीतीश
राजनीति में एक दूसरे के कड़े प्रतिद्वंद्वी लालू यादव और नीतीश कुमार अब पड़ोसी होंगे। लोकसभा चुनाव में जद (यू) की करारी हार की वजह से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके नीतीश सर्कुलर रोड के बंगला नंबर 7 में रहेंगे।
जबकि 10, सर्कुलर रोड पर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी का आवास है। लालू यहीं रहते हैं। नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री निवास, 1 अणे मार्ग छोड़ देंगे।
वह यहां नौ साल तक रहे। 7 सर्कुलर रोड के बंगले में इस समय राज्य के मुख्य सचिव अशोक कुमार सिन्हा रह रहे हैं। सिन्हा को जून के आखिर में रिटायर होना है।