पूरब को नई पहचान देगा नालंदा विश्वविद्यालय

हिमांशु मिश्र Updated Mon, 20 Jan 2014 11:55 AM IST
nalanda vishwavidhyalay will give a new identity
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कभी ज्ञान के क्षेत्र में पश्चिम से कोसों आगे रहने वाला पूरब फिर से नई करवट लेने को तैयार हो रहा है।
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करीब 800 साल बाद नए सिरे से तैयार किए जा रहे नालंदा विश्वविद्यालय की पुरानी अंतर्राष्ट्रीय साख बहाल करने में जुटे एशियाई देशों ने इसे ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड और कैंब्रिज विश्वविद्यालय से भी अधिक महान बनाने का सपना देखा है।

यही कारण है कि विवि में शिक्षकों और विद्यार्थियों के चयन के लिए बनाए गए पूरी तरह स्वायत्त 12 सदस्यीय गवर्निंग बोर्ड में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों को शामिल किया गया है।


विवि में नौ स्कूल और तीन सौ फैकल्टी होंगी। हर फैकल्टी में करीब 350 विद्यार्थी व करीब 70 शिक्षक रखने की योजना है।

विवि परिसर में अस्थाई रूप से बने राजगीर कैंपस में दो स्कूलों की शुरुआत इसी साल सितंबर में होगी। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए जल्द ही वैश्विक टेंडर जारी होगा, जिसमें शिक्षकों को कैंब्रिज, हार्वड और ऑक्सफोर्ड की तरह वेतन, सुविधाएं देने की घोषणा की जाएगी।

विदेश मंत्रालय में नालंदा डेस्क के निदेशक अनुपम रे के मुताबिक निर्माण कार्य से जुड़े देशों का लक्ष्य विवि को सबसे अच्छा या बहुत अच्छा बनाने की जगह इसे महान बनाने की है।

ठीक वैसा ही जैसा यह विवि अतीत में था। गवर्निंग बोर्ड में नामी हस्तियों को शामिल करने के अलावा विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को इसका कुलाधिपति और डॉ. गोपा सबरवाल को कुलपति बना कर इस दिशा में कदम उठाया गया है।

यूरोपीय संघ ने दिखाई दिलचस्पी

इस विश्वविद्यालय की पुरानी साख कायम करने के लिए भारत, चीन, सिंगापुर और थाइलैंड ने हाथ मिलाया था। मुहिम आगे बढ़ने पर यूरोपीय संघ के अलावा अन्य देशों ने भी दिलचस्पी दिखाई। अब इन चार देशों के अलावा आॅस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, लाओस, श्रीलंका, सिंगापुर और न्यूजीलैंड भी इस मुहिम में जुड़ गए हैं। कैंपस निर्माण में 2700 करोड़ रुपये और अन्य ढांचों के निर्माण पर लगभग 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत आसपास के 200 गांवों का भी विकास किया जाएगा।

विवि का गवर्निंग बोर्ड
कुलाधिपति अमर्त्य सेन, कुलपति डॉ. गोपा सबरवाल, सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जार्ज येओ, नेशलन यूनिवर्सिटी के वांग गंगवु, हार्वर्ड विवि की सुगाता बोस, जापानी विद्वान सुसुमु नाकानिशि, पेकिंग विवि के वाग बांगवेई, सिटी विवि न्यूयार्क के तानसेन सेन, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के मेघनाथ देसाई, सांसद एनके सिंह और विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) अनिल बाधवा।

एक सितंबर से पहला शैक्षणिक सत्र

इस साल एक सितंबर से राजगीर में बने अस्थाई कैंपस में दो स्कूल अध्ययन के लिए खोल दिए जाएंगे। इनमें इतिहास और पर्यावरण की पढ़ाई होगी। पहले सत्र में 40 छात्रों को मौका मिलेगा। विवि में स्नातकोत्तर की पढ़ाई होगी और सारा जोर अनुसंधान पर होगा। विवि परिसर पुराने विवि से
महज 8 किमी की दूरी पर होगा।
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