{"_id":"13f3b8a8b6a76f61877ed71303b5e2f0","slug":"nalanda-university-admission-bihar-rajgir-nalanda","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐतिहासिक नालंदा विवि में जल्दी ही शुरू होगा एडमिशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऐतिहासिक नालंदा विवि में जल्दी ही शुरू होगा एडमिशन
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 29 Nov 2013 11:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश के सबसे पुरानी विश्वविद्यालयों में से एक नालंदा विश्वविद्यालय में जल्दी ही देश-विदेश के बच्चे पढ़ाई करते हुए देखे जा सकते हैं।
विज्ञापन
योजना के मुताबिक, वर्ष 2014 से इस विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू होने की संभावना है। प्राचीन विश्वविद्यालय के खंडहर के नजदीक एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाने की योजना बनाई गई है, जहां दुनिया भर के छात्र और शिक्षक एक साथ मिलकर ज्ञान पा सकेंगे।
विज्ञापन
इस नए विश्वविद्यालय में न केवल प्राचीन विषयों की, बल्कि आधुनिक विषयों की भी पढ़ाई होगी।
अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गोपा सबरवाल ने कहा कि, 'शैक्षणिक सत्र सितंबर 2014 से शुरू हो जाएगा। इस सत्र में 40 विद्यार्थी प्रवेश पा सकेंगे। इसके लिए दिसंबर में प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2014-15 में दो स्कूलों, इतिहास और पर्यावरण अध्ययन खुल जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की चाहरदीवारी का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। विश्वविद्यालय के भवन निर्माण का कार्य 2021 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रारंभ में पूर्व नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की परिकल्पना पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी। कलाम उस समय जिले में एक रेल कोच कारखाने का शिलान्यास करने आए थे। नीतीश कुमार उस समय केंद्र सरकारी में रेल मंत्री थे और कलाम ने उनसे नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने की चर्चा की थी। इसके बाद नीतीश कुमार ने इसके स्थापना की पहल की।
गौरतलब है कि पांचवीं सदी में बने प्राचीन विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिनके लिए 1500 अध्यापक हुआ करते थे। छात्रों में अधिकांश एशियाई देशों चीन, कोरिया, जापान से आने वाले बौद्ध भिक्षु होते थे। इतिहासकारों के मुताबिक चीनी बौद्ध भिक्षु ह्वेनसांग ने भी सातवीं सदी में नालंदा में शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने अपनी किताबों में नालंदा विश्वविद्यालय की भव्यता का जिक्र किया है।
(इस खबर पर अपनी राय देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेंट करें।)