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Bihar News: सिविल कोर्ट कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, न्यायिक कामकाज ठप; सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
Fri, 17 Jan 2025 05:30 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Fri, 17 Jan 2025 05:30 PM IST
सार
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट के कर्मचारियों की हड़ताल ने न्यायिक प्रणाली में गंभीर अवरोध पैदा कर दिया है। कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
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अदालती कामकाज ठप होने से जनता और पुलिस को हो रही परेशानी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट के न्यायिक कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। अपनी वेतनमान विसंगतियों और अन्य मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे कर्मचारियों ने कोर्ट परिसर में सरकार विरोधी नारे लगाए। उन्होंने कहा कि इस स्थिति के लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। हड़ताल के कारण न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम जनता, पुलिस और कोर्ट से जुड़े कामों में बाधा उत्पन्न हो रही है।
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35 वर्षों से लंबित वेतन विसंगति पर आक्रोश
मुजफ्फरपुर जिला इकाई संघ के सचिव उमेश प्रसाद ने बताया कि हड़ताल का मुख्य कारण 35 वर्षों से लंबित वेतनमान विसंगतियों का समाधान न होना है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से पारित आदेश के बावजूद हमारी मांगों को दरकिनार कर दिया गया है। यह हमें न्याय दिलाने के अधिकार से वंचित करने जैसा है। सरकार ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति और वेतन सुधार की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। धरना में शामिल करीब 300 कर्मियों ने काम न करने का संकल्प लिया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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महिला कर्मियों की नाराजगी
कोर्ट की महिला कर्मी नेहा कुमारी ने कहा कि कर्मियों को स्नातक योग्यता के आधार पर बहाल किया गया था, लेकिन वेतनमान मैट्रिक योग्यता के आधार पर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे साथ अन्याय है। स्नातक आधार पर नियुक्ति के बावजूद, हमारा वेतनमान निचले स्तर पर रखा गया है। अनुकंपा बहाली और वेतन विसंगतियों को जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए।
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आम जनता को हो रही परेशानी
हड़ताल के कारण कोर्ट में सभी प्रकार के न्यायिक कामकाज बाधित हो गए हैं। लंबित मामलों की सुनवाई ठप होने से वादियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए गए मामलों की सुनवाई भी नहीं हो पा रही है। आम जनता के साथ-साथ वकीलों और पुलिस अधिकारियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में तारीख आगे बढ़ा दी गई है, जिससे लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
सरकार पर गंभीर आरोप
कर्मचारियों ने सरकार पर न्यायिक कर्मचारियों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हमारा संघर्ष केवल वेतनमान सुधार तक सीमित नहीं है। सरकार को न्यायिक कार्यों की मूलभूत जरूरतों को समझना होगा। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा।