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सरस्वती पूजा पर अनोखी पहल: मुजफ्फरपुर के रामबाग में गोधन पूजा थीम से सजा पंडाल, संस्कृति संरक्षण का संदेश

Fri, 23 Jan 2026 08:46 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Fri, 23 Jan 2026 08:46 PM IST
सार

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर के रामबाग में सरस्वती पूजा के अवसर पर युवाओं ने गोधन पूजा थीम पर अनोखा पंडाल बनाया है। 70 वर्षों पुरानी परंपरा के तहत यह पहल बिहार की समृद्ध संस्कृति को संरक्षित करने और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश देती है।

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Muzaffarpur Bihar news : youth created a unique themed puja pandal in saraswati puja to initiative culture
सरस्वती पूजा पर अनोखी पहल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरपुर जिले में विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। शहर के विभिन्न इलाकों में स्थापित पूजा पंडाल और आकर्षक प्रतिमाएं लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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रामबाग पूजा समिति का पंडाल बना आकर्षण का केंद्र
इसी क्रम में मुजफ्फरपुर के रामबाग स्थित सरस्वती पूजा समिति का पूजा पंडाल विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींच रहा है। यहां युवाओं ने एक अनोखी थीम पर पंडाल का निर्माण किया है, जो बिहार के लोकप्रिय पर्व छठ पूजा के बाद मनाई जाने वाली गोधन पूजा पर आधारित है।
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सरस्वती पूजा पर अनोखी पहल
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70 वर्षों से चली आ रही परंपरा
रामबाग सरस्वती पूजा समिति द्वारा पिछले करीब 70 वर्षों से सरस्वती पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस बार पूजा को लेकर समिति के युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, क्योंकि पंडाल को पारंपरिक और सांस्कृतिक संदेश के साथ सजाया गया है।
 
बिहार की संस्कृति को सामने लाने का प्रयास
समिति के सदस्यों ने निर्णय लिया कि इस बार पूजा का उद्देश्य केवल आयोजन तक सीमित न रहकर बिहार की परंपरा और संस्कृति को लोगों के सामने लाना होगा। इसी सोच के तहत पंडाल को इस तरह सजाया गया है कि आने वाले लोग बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जान सकें और समझ सकें।

सरस्वती पूजा पर अनोखी पहल

 
गोधन पूजा को बनाया गया केंद्र बिंदु
पंडाल की थीम में छठ पूजा के बाद मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा, जिसे गोधन पूजा भी कहा जाता है, को केंद्र में रखा गया है। इसके माध्यम से बिहार की ग्रामीण परंपरा, देवी-देवताओं और सांस्कृतिक प्रतीकों का चित्रण किया गया है, ताकि परंपराओं की विविधता को दर्शाया जा सके।

सरस्वती पूजा पर अनोखी पहल

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युवाओं को संस्कृति से जोड़ने का संदेश
सरस्वती पूजा समिति के सदस्य छोटू कुमार ने बताया कि इस पूजा और पंडाल के माध्यम से युवाओं को यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि बिहार की परंपरा और संस्कृति अत्यंत समृद्ध है और इसे संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज के युवा तेजी से अपनी परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में इस तरह की पहल उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगी।
 
संरक्षण से ही बचेगी सांस्कृतिक विरासत
समिति का मानना है कि जब तक बिहार की संस्कृति और विरासत को संरक्षित नहीं किया जाएगा, तब तक इसकी पहचान भी कमजोर होती जाएगी। इसी सोच के साथ इस वर्ष की सरस्वती पूजा को एक सांस्कृतिक संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


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