{"_id":"663f28b31fbdb5693007eea1","slug":"lok-sabha-chunav-satta-ka-sangram-in-sheohar-discussion-with-youth-sheohar-lok-sabha-seat-2024-05-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Satta Ka Sangram: शिवहर के युवा बोले- विकास प्रमुख मुद्दा, बाहरियों के शासन में यहां रत्ती भर काम नहीं हुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Satta Ka Sangram: शिवहर के युवा बोले- विकास प्रमुख मुद्दा, बाहरियों के शासन में यहां रत्ती भर काम नहीं हुआ
Sat, 11 May 2024 01:43 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवहर
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 11 May 2024 01:43 PM IST
सार
Lok Sabha 2024: अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ शनिवार को शिवहर लोकसभा क्षेत्र पहुंचा। यहां अमर उजाला ने सुबह चाय पर चर्चा की। वहीं, अब दोपहर में मतदाताओं के मुद्दों पर युवाओं से चर्चा की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर...।
विज्ञापन
शिवहर में युवाओं से चर्चा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शनिवार को बिहार के शिवहर लोकसभा क्षेत्र में पहुंचा। यहां सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाताओं के मुद्दे जाने गए। वहीं, अब दोपहर में युवाओं से चर्चा में उनके मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
विज्ञापन
अमर उजाला से बात करते हुए युवा मतदाता ने कहा कि इस बार शिवहर में विकास चुनावी मुद्दा है और विकास का ही मुद्दा होना चाहिए। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बाहरी भगाओ शिवहर बचाओ। शिवहर के सभी लोग मन बना चुके हैं कि इस बार बाहरी लोग अब नहीं चाहिए। हमने बाहरी लोगों का शासन देख लिया है और अब उससे ऊब गए हैं। उन्होंने कहा कि शिवहर को पंडित रघुनाथ झा ने बनाया था। उनके बाद काफी लोग आए और गए, लेकिन शिवहर का विकास रत्ती भर नहीं हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक अन्य युवा मतदाता ने कहा कि साल 2005 से पहले यहां जंगलराज होता था। मैंने तो देखा बिहार की दिशा को देखा है और दशा को भी। वहीं उसके बाद के बिहार को अब सब लोग देख रहे हैं। ये कौन सी पार्टी है भाई जो आपके आंख पर बिल्कुल काली पट्टी बंध गई है। पहले ये डोपा पुल नहीं हुआ करता था, पहाड़ी पुल नहीं था, ये सड़कें नहीं हुआ करती थीं। लेकिन अब हैं।