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Bihar: गरीबों की दवा बनी राख! अस्पताल में दीमक खाती रहीं सरकारी मेडिसिन, खुलासा होते ही लगा दी आग

Sun, 24 May 2026 06:38 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्वी चंपारण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्वी चंपारण Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sun, 24 May 2026 06:38 PM IST
सार

Bihar: पूर्वी चंपारण के चिरैया प्रखंड स्थित हरिहर गांव के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी दवाइयों की भारी लापरवाही सामने आई है। मरीजों तक पहुंचने के बजाय दवाइयां गोदाम में सड़ती रहीं और बाद में उन्हें जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश का आरोप लगा है। 

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Government medicine reduced to ashes medical stock burned to destroy evidence Motihari Bihar
एक्सपायरी दवा और उसे जलाकर सुबूत मिटाते कर्मी

विस्तार

पूर्वी चंपारण के चिरैया प्रखंड स्थित हरिहर गांव का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों इलाज नहीं, बल्कि लापरवाही और सरकारी सिस्टम की सड़ांध का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। यहां गरीब मरीजों के लिए आई सरकारी दवाइयां मरीजों तक पहुंचने के बजाय गोदामों में सड़ती रहीं। हालत ऐसी हुई कि लाखों रुपये की दवाइयों को दीमक चाट गई। और जब मामला खुलने लगा, तो सबूत मिटाने के लिए उन्हीं दवाइयों में आग लगा दी गई। अब इस पूरे खेल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलकर रख दी है।

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वायरल वीडियो ने खोली पोल
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दवा की बोतलों पर “Bihar Govt. Supply – Not For Sale” लिखा हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन दवाइयों को जलाया जा रहा था, उनकी एक्सपायरी डेट जुलाई 2026 है। यानी दवाइयां अभी पूरी तरह उपयोग योग्य थीं।
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गोदाम में सड़ती रहीं दवाइयां
अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, मरीजों को दवा वितरण में लापरवाही और बदहाल व्यवस्था के कारण ये दवाइयां बोरियों में बंद पड़ी रहीं। धीरे-धीरे उनमें मिट्टी जम गई और दीमक लग गई।
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सबूत मिटाने के आरोप
सूत्र बताते हैं कि जब बड़े पैमाने पर दवाइयों के खराब होने की बात सामने आने लगी और जांच का खतरा मंडराने लगा, तब अस्पताल कर्मियों ने इन्हें चुपचाप जलाकर मामला दबाने की कोशिश की।

ग्रामीणों ने बनाया वीडियो
लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। अस्पताल के पीछे जलती दवाइयों को देखकर ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोगों ने न सिर्फ विरोध किया, बल्कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बना लिया। अब वही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

ग्रामीणों का गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र पर डॉक्टर नियमित रूप से नहीं आते, मरीजों को इलाज नहीं मिलता और सरकारी दवाइयां गोदामों में सड़ती रहती हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय पर दवाइयों का वितरण होता, तो गरीबों के इलाज में काम आने वाली लाखों की दवा यूं आग के हवाले नहीं होती।


उठ रहे कई बड़े सवाल
अब सवाल कई हैं
क्या सरकारी दवाइयों को जानबूझकर बर्बाद किया गया?
क्या लापरवाही छिपाने के लिए सबूत जलाए गए?
और सबसे बड़ा सवाल… आखिर गरीबों के हक की दवा किसकी लापरवाही में राख बन गई?

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जांच और कार्रवाई की मांग
फिलहाल वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग पर सवालों की बौछार है, जबकि ग्रामीण पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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