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Bihar: मोतिहारी में 21 बच्चों के साथ पकड़े गए व्यक्ति पर गहराया रहस्य, मानव तस्करी के एंगल पर उठे बड़े सवाल

Sun, 17 May 2026 08:18 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sun, 17 May 2026 08:18 PM IST
सार

मोतिहारी में बापूधाम रेलवे स्टेशन से 21 बच्चों के साथ पकड़े गए कथित मानव तस्कर मामले में अब सवाल कम और सवालों से बचने की कोशिश ज्यादा दिखाई देने लगी है। आइए पूरा मामला समझते हैं। 

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child trafficking case: where were the children being taken at night Motihari Bihar News
तस्कर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मोतिहारी के बापूधाम रेलवे स्टेशन पर 21 बच्चों के साथ पकड़े गए कथित मानव तस्कर के मामले में अब सवाल कम और सवालों से बचने की कोशिश ज्यादा दिखाई दे रही है। जिस तेजी से पूरे मामले को “सामान्य” साबित करने का प्रयास हो रहा है, उसने कई नए संदेह खड़े कर दिए हैं।

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एक ओर जीआरपी और कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि पकड़ा गया व्यक्ति बच्चों को पढ़ाता है और हॉस्टल चलाता है, वहीं दूसरी ओर अब तक किसी मान्यता प्राप्त स्कूल का स्पष्ट दस्तावेज या हॉस्टल संचालन का वैध लाइसेंस सामने नहीं आया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 5 से 13 वर्ष आयु के 21 बच्चों जिनमें पांच बच्चियां भी शामिल थीं को एक अकेला व्यक्ति रात के समय लेकर क्यों जा रहा था?

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यदि वह शिक्षक था, तो उसके पास बच्चों के अभिभावकों की लिखित सहमति क्यों नहीं थी? अगर बच्चे किसी स्कूल में पढ़ते थे, तो पूछताछ के दौरान कई बच्चों ने यह क्यों कहा कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें वहां क्यों रखा गया है? और यदि गर्मी की छुट्टियों के बाद बच्चों को घर पहुंचाया जा रहा था, तो कौन सा स्कूल या हॉस्टल ऐसी व्यवस्था करता है, जहां एक शिक्षक खुद अलग-अलग जिलों और राज्यों के बच्चों को लेकर घर-घर पहुंचाने निकल पड़े?

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मामले में सबसे अधिक चर्चा उस महिला के बयान को लेकर हो रही है, जिसे बच्चों की अभिभावक बताकर डीएम के सामने पेश किया गया। महिला ने कहा कि उसके बेटे “अमित गुजूर”, “सुमित गुजूर” और “बालविंद बिंद” हैं। साथ ही उसने बताया कि कुछ बच्चे झारखंड के हैं और कुछ बिहार के। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक ही मां के बच्चों के सरनेम अलग-अलग कैसे हो सकते हैं? यदि महिला झारखंड की है, तो बच्चों का पता बिहार का कैसे बताया गया?

सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि बच्चों को भागलपुर ले जाया जा रहा था, तो उनके पास टिकट क्यों नहीं था? तीन बच्चे भागलपुर के बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी गोड्डा और साहेबगंज के हैं। ऐसे में सभी बच्चों को एक साथ भागलपुर क्यों ले जाया जा रहा था?

मामले में अब भी कई गंभीर बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है

  • क्या कथित संचालक का हॉस्टल निर्धारित मानकों के अनुरूप है?
  • क्या प्रशासन ने स्थल निरीक्षण कर इसकी पुष्टि की है?
  • दूसरे राज्यों के आदिवासी बच्चों को मोतिहारी में रखकर पढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
  • आवेदन में दर्ज बयानों के बावजूद पॉक्सो एक्ट की धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं?

अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच निष्पक्ष होगी या जल्दबाजी में किसी को क्लीनचिट देने की तैयारी चल रही है। क्योंकि बच्चों से जुड़ा मामला न केवल संवेदनशील है, बल्कि कानून और मानवाधिकार दोनों के दायरे में बेहद गंभीर माना जाता है।

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