फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Bihar news hajipur vaishali rampur shyamchand villagers cross river ropebjugaad boat vaishali News

तेजस्वी के क्षेत्र में बदहाली की तस्वीर: 13 बच्चों की मौत के बाद नाव जब्त, रस्सी के सहारे नदी पार कर रहे लोग

Sat, 17 Oct 2026 10:37 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sat, 17 Oct 2026 10:37 AM IST
सार

 Bihar News : तेजस्वी यादव के विधानसभा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा नावों के सहारे ही अब भी। सरकार बड़ी परियोजनाओं पर केंद्रित है, जबकि विपक्ष के नेता यहां आज तक कुछ बदलाव नहीं कर सके हैं। नाव हादसे में 13 की मौत के बाद क्या है राघोपुर का हाल?

विज्ञापन
Bihar news hajipur vaishali rampur shyamchand villagers cross river ropebjugaad boat vaishali News
नदी पार करते हुए लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद में नाव हादसे में 13 मासूम बच्चों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। हादसे के बाद प्रशासन ने जिस जर्जर नाव को जब्त कर लिया, वह भले ही लोगों के लिए खतरा बनी हुई थी, लेकिन अब सवाल यह है कि उसके हटने के बाद ग्रामीणों के पास नदी पार करने का सुरक्षित विकल्प क्या है? इसी पंचायत के रामपुर नौसहन गांव के वार्ड नंबर एक की तस्वीर बताती है कि यहां के लोग आज भी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। कहीं नाव की व्यवस्था नहीं है तो कहीं लोग रस्सी पकड़कर नदी पार कर रहे हैं। एक ही पंचायत के दो वार्डों की बदहाली के बीच सवाल उठता है कि हादसे के बाद व्यवस्था बदली या लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं?

विज्ञापन

नाव जब्त होने के बाद रस्सी ही सहारा

रामपुर नौसहन गांव के वार्ड नंबर एक में नदी पार करने के लिए ग्रामीणों के पास कोई सुरक्षित साधन नहीं है। यहां लोग दोनों किनारों पर बांधी गई रस्सी को पकड़कर नदी पार करते हैं। जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है। यह स्थिति तब है, जब इसी पंचायत के वार्ड नंबर आठ में नाव हादसे में 13 बच्चों की मौत हो चुकी है। उस हादसे के बाद जर्जर नाव को जब्त कर लिया गया, लेकिन प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत अब भी बनी हुई है।

विज्ञापन


रामपुर भट्टी टोला के बीच से गंगा और गंडक को जोड़ने वाली नदी गुजरती है। इस नदी के दूसरी ओर बसे करीब 20 घरों के लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए इसे पार करना पड़ता है। दोनों तरफ सड़क है, लेकिन बीच में 20 फीट से ज्यादा गहरा गड्ढा है। पानी कम होने के बावजूद इसमें 10 फीट से ज्यादा पानी भरा हुआ है। ऐसे में नदी पार करना किसी जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नदी के दोनों किनारों पर एक रस्सी बांधी गई है। लोग उसी को पकड़कर एक तरफ से दूसरी तरफ जाते हैं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों के सामने कोई आसान विकल्प नहीं है। ऐसे में यह अस्थायी जुगाड़ उनकी मजबूरी बन गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

दो बार आई बाढ़, ग्रामीणों का आरोप- नहीं मिली नाव

ग्रामीणों का आरोप है कि इस साल राघोपुर प्रखंड में दो बार बाढ़ आई, लेकिन उनके इलाके के लिए प्रशासन की ओर से एक भी नाव उपलब्ध नहीं कराई गई। बाढ़ के दौरान कर्मचारियों से नाव की मांग की गई, लेकिन व्यवस्था नहीं हो सकी। करीब 20 दिनों तक इलाके में बाढ़ का पानी जमा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी उनकी सुध लेने पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि। समस्या सिर्फ नदी पार करने तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, इलाके में राशन की दुकान भी नहीं है। लोगों को राशन लेने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। बाढ़ के समय रास्ते और भी मुश्किल हो जाते हैं। ऐसे में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी ग्रामीणों को जोखिम उठाना पड़ता है।

दो साल पहले डूबने से हुई थी बेटे की मौत

ग्रामीण विनोद राय ने बताया कि करीब दो साल पहले इसी पानी में डूबने से उनके बेटे राम शंकर कुमार की मौत हो गई थी। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान इस इलाके में कोई न कोई हादसा होता है, लेकिन इसके बावजूद हालात नहीं बदले। विनोद राय के मुताबिक, यहां से निकलने का दूसरा रास्ता काफी लंबा है। उस रास्ते से लोहे के पुल के जरिए जाना पड़ता है, लेकिन वहां भी घुटने भर कीचड़ रहता है। कीचड़ से होकर गुजरना भी बेहद मुश्किल है। इसी वजह से लोग मजबूरी में रस्सी के सहारे नदी पार करने वाला रास्ता अपनाते हैं।

हादसे के बाद व्यवस्था बदली या सिर्फ नाव हटी?

रामपुर श्यामचंद में 13 मासूम बच्चों की मौत के बाद जर्जर नाव को जब्त कर लिया गया। लेकिन उसी पंचायत के दूसरे वार्ड में रहने वाले करीब 20 परिवार आज भी नदी पार करने के लिए सुरक्षित साधन का इंतजार कर रहे हैं। नाव हादसे के बाद प्रशासन की कार्रवाई के साथ यह सवाल भी जरूरी है कि जिन लोगों की आवाजाही नाव पर निर्भर थी, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?



सरकार के दावों और विपक्ष की बयानबाजी के बीच रामपुर नौसहन की यह तस्वीर आम लोगों की रोजमर्रा की मुश्किलों को सामने रखती है। एक तरफ हादसे के बाद नाव हटाई गई, तो दूसरी तरफ ग्रामीण रस्सी के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं। सवाल है कि क्या प्रशासन इन परिवारों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराएगा, या फिर उन्हें किसी और हादसे के बाद ही राहत मिलेगी?

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed