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Bihar News: रामलखन सिंह कॉलेज में जन्मतिथि में फर्जीवाड़ा कर नौकरी करने का मामला आया सामने, जांच शुरू
Mon, 22 Jul 2024 03:33 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेतिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेतिया
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Mon, 22 Jul 2024 03:33 PM IST
सार
Bettiah News: बेतिया के रामलखन सिंह कॉलेज से जन्मतिथि फर्जीवाड़ा कर नौकरी करने का मामला सामने आया है। इसमें कर्मियों और कॉलेज के प्रधान सहायक के सर्टिफिकेट जांच के घेरे में हैं। जानें पूरा मामला...।
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रामलखन सिंह कॉलेज, बेतिया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बेतिया के रामलखन सिंह यादव महाविद्यालय में एक बहुत बड़ा गड़बड़ झाला सामने आया है। जहां जन्मतिथि में फेरबदल कर दो कर्मी नौकरी करते आ रहे हैं। मामले का खुलासा होते ही महाविद्यालय में हड़कंप मच गया है। विश्वविद्यालय द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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जानकारी के मुताबिक, जन्मतिथि में फर्जीवाड़ा कर 15 साल की उम्र से कर्मचारी नौकरी कर रहे हैं। ऐसे मामले में दो लोगों का भंडाफोड़ हो गया। मामले को लेकर विश्वविद्यालय द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। कॉलेज के एक नहीं कई कर्मियों की जन्मतिथि में हेरा फेरी की लंबी सूची है। यह सूचना भी सामने आ रही है कि सिर्फ कर्मियों में ही नहीं, बल्कि कई प्राध्यापकों के भी सर्टिफिकेट में गड़बड़ झाला है। हालांकि अब यह मामला विश्वविद्यालय में पहुंच गया है।
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कॉलेज के एक चतुर्थ वर्गीय कर्मी के अलग-अलग जन्मतिथि के दो सर्टिफिकेट जांच के घेरे में हैं। विश्वविद्यालय की ओर से जिसकी जांच हो रही है। उसमें 18 साल से कम उम्र में हुई नौकरी, एक दर्जन जन्मतिथि और फर्जी मार्कशीट पर नौकरी का खुलासा, ऐसे कर्मी जिनके दो-दो जन्मतिथि के अलग-अलग सर्टिफिकेट आदि मौजूद हैं।
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गौरतलब है कि यहां नौकरी करने के लिए न उम्र की सीमा मायने रखती है और न ही जन्मतिथि। सरकार ने भले ही नौकरी के लिए उम्र की न्यूनतम सीमा 18 वर्ष निर्धारित की है, लेकिन कॉलेज के कई कर्मी खेलने-खाने और स्कूल में पढ़ने की उम्र से नौकरी कर रहे हैं। कई तो नौकरी पूरी कर सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं और सरकार से पेंशन ले रहे हैं। फर्जीवाड़े के बल पर कॉलेज के प्रधान सहायक विजय प्रसाद यादव के बिहार बोर्ड से जारी सर्टिफिकेट में 12 नवंबर 1969 जन्म तिथि अंकित है। जबकि 22 अक्टूबर 1985 को इनका योगदान पत्र जारी हुआ है। यानी 16 साल तीन महीने और 10 दिन में ये नौकरी करने के योग्य हो गए हैं और नौकरी भी कर रहे हैं। कॉलेज में ऐसे एक नहीं कई उदाहरण हैं।
यहां तक कि पूर्व प्रधान सहायक रंजीत सिंह यादव अब कॉलेज से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन्हें हर माह पेंशन भी मिलती है। बिहार बोर्ड से जारी सर्टिफिकेट में उनकी जन्मतिथि 24 नवंबर 1962 अंकित है। इनका योगदान पत्र 14 दिसंबर 1977 को जारी हुआ है। यानी इन्होंने 15 साल 20 दिन की उम्र से कॉलेज में नौकरी करनी शुरू कर दी थी। आरोप है कि विश्वविद्यालय और कॉलेज की मिलीभगत से बड़ा खेल हुआ है। वहीं, कहा जा रहा है कि जांच में बाबा भीमराव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के कई कॉलेज के कर्मी और प्राध्यापक भी बेनकाब होंगे।
कैसे हुआ मामले का भंडाफोड़
दरअसल, फरवरी महीने में प्रधान सहायक की सेवानिवृत्ति के बाद इस पद के लिए कॉलेज के कई दावेदार सामने आ गए। विजय प्रसाद यादव को प्रधान सहायक बनाया गया, लेकिन कई कर्मियों को यह रास नहीं आया। फिर उन्होंने उनके सर्टिफिकेट में अंकित जन्मतिथि को लेकर विश्वविद्यालय में शिकायत कर दी। मामला इतना बढ़ा कि कर्मी ही एक-दूसरे का कच्चा चिट्ठा खोलने लगे। जैसे ही लोगों को इन सारी बातों की जानकारी हुई कॉलेज में हड़कंप मच गया।