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Bihar: मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में एक और मौत: इलाज के दौरान मरीज ने तोड़ा दम, मृतकों की संख्या हुई सात
Sat, 06 Jun 2026 04:04 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 04:04 PM IST
सार
मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल अग्निकांड में झुलसे 60 वर्षीय अंजनी कुमार सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। हादसे में गंभीर रूप से झुलसे एक और मरीज की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान करजा थाना क्षेत्र के चैनपुर पररी गांव निवासी 60 वर्षीय अंजनी कुमार सिंह के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, अग्निकांड के बाद अंजनी कुमार सिंह को गंभीर हालत में बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी। शनिवार को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों ने घटना को अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पहले ही जा चुकी हैं छह लोगों की जान
प्रसाद अस्पताल में आग लगने की घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। इस हादसे में पहले ही छह मरीजों की मौत हो चुकी थी। अब अंजनी कुमार सिंह की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। लगातार बढ़ती मौतों ने घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
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अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
अग्निकांड के बाद अस्पतालों में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त होते तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा शव
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने मरीज की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि अग्निकांड में घायल एक मरीज का इलाज के दौरान निधन हो गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी जारी है। वहीं, पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मृतक अंजनी कुमार सिंह के परिजनों ने बताया कि वह गांव में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकान चलाते थे। किडनी के इलाज के लिए उन्हें 3 जून को प्रसाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका उपचार डॉ. धर्मेंद्र प्रसाद की देखरेख में चल रहा था। परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन उनका डायलिसिस किया गया था, जिसके बाद वे सो गए थे। अगले दिन सुबह आईसीयू में अचानक आग लग गई। आग लगने और तेज आवाज सुनकर उनके दामाद तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने साहस दिखाते हुए आईसीयू के कमरे में प्रवेश किया और अंजनी कुमार सिंह को कंबल से ढंककर सुरक्षित बाहर निकाला।
इसके बाद उन्हें जूरन छपरा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान शनिवार को उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि उस भयावह घटना को वे कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रसाद अस्पताल में इलाज के दौरान पहले ही लाखों रुपये खर्च हो चुके थे। वहीं, आग की घटना के बाद जिस निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया, वहां परिजनों से 11 हजार रुपये जमा कराए गए। परिजनों ने अंजनी कुमार सिंह की मौत के लिए प्रसाद अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ये भी पढ़ें- Bihar News: खान सर आज नहीं करेंगे सरेंडर, वकील ने कहा- अग्रिम जमानत याचिका दायर करेंगे, प्राथमिकी गलत है
न्याय और जवाबदेही की मांग तेज
सात लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोश है। परिजन घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अस्पतालों में सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की मांग कर रहे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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जानकारी के अनुसार, अग्निकांड के बाद अंजनी कुमार सिंह को गंभीर हालत में बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन उनकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी। शनिवार को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों ने घटना को अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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पहले ही जा चुकी हैं छह लोगों की जान
प्रसाद अस्पताल में आग लगने की घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। इस हादसे में पहले ही छह मरीजों की मौत हो चुकी थी। अब अंजनी कुमार सिंह की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। लगातार बढ़ती मौतों ने घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
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अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
अग्निकांड के बाद अस्पतालों में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त होते तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा शव
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने मरीज की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि अग्निकांड में घायल एक मरीज का इलाज के दौरान निधन हो गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी जारी है। वहीं, पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मृतक अंजनी कुमार सिंह के परिजनों ने बताया कि वह गांव में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकान चलाते थे। किडनी के इलाज के लिए उन्हें 3 जून को प्रसाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका उपचार डॉ. धर्मेंद्र प्रसाद की देखरेख में चल रहा था। परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन उनका डायलिसिस किया गया था, जिसके बाद वे सो गए थे। अगले दिन सुबह आईसीयू में अचानक आग लग गई। आग लगने और तेज आवाज सुनकर उनके दामाद तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने साहस दिखाते हुए आईसीयू के कमरे में प्रवेश किया और अंजनी कुमार सिंह को कंबल से ढंककर सुरक्षित बाहर निकाला।
इसके बाद उन्हें जूरन छपरा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान शनिवार को उनकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि उस भयावह घटना को वे कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रसाद अस्पताल में इलाज के दौरान पहले ही लाखों रुपये खर्च हो चुके थे। वहीं, आग की घटना के बाद जिस निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया, वहां परिजनों से 11 हजार रुपये जमा कराए गए। परिजनों ने अंजनी कुमार सिंह की मौत के लिए प्रसाद अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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न्याय और जवाबदेही की मांग तेज
सात लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोश है। परिजन घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अस्पतालों में सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की मांग कर रहे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को कटघरे में खड़ा कर दिया है।