फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   muzaffarpur child death

अज्ञात बीमारी का कहर, 45 बच्चों की मौत

Sat, 14 Jun 2014 07:55 AM IST
मनीष शांडिल्य/मुज़फ़्फ़रपुर से बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
मनीष शांडिल्य/मुज़फ़्फ़रपुर से बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए Updated Sat, 14 Jun 2014 07:55 AM IST
विज्ञापन
muzaffarpur child death

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर और इसके आसपास के ज़िलों में मई के अंत में फैली अज्ञात बीमारी से अब तक 45 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। चिकित्सकों के मुताबिक़ इस बीमारी में बच्चों में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के लक्षण मिल रहे हैं।

विज्ञापन


बुधवार रात दो बच्चों की मौत मुज़फ़्फ़रपुर के सरकारी अस्पताल श्रीकृष्ण मेमोरियल चिकित्सा अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल अस्पताल में बुधवार को दो बच्चों की और गुरुवार सुबह एक बच्चे की मौत हो गई।
विज्ञापन


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ रविवार से गुरुवार के बीच मरने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी हो गई है। वहीं स्थानीय मीडिया के मुताबिक़ सरकारी आंकड़ों से अधिक बच्चों की मौत हो हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एसकेएमसीएच की बहुमंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर बच्चों के लिए दो गहन चिकित्सा केंद्र यानी की पीआईसीयू बने हैं। इस साल गर्मी बढ़ते ही पिछले दो हफ्तों में 70 से अधिक बच्चे ‘अज्ञात बीमारी’ से पीड़ित होकर इलाज के लिए आए हैं।

ऐसे ज्यादातर बच्चे मुज़फ़्फ़रपुर और इसके आस-पास के ज़िलों के ग्रामीण इलाकों से यहां पहुंच रहे हैं। फिलहाल इन दो पीआईसीयू में कुल 14 बिस्तर हैं। लेकिन अधिक बच्चों के आने से एक बिस्तर पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। पीआईसीयू के बाहर परिजनों की भीड़ लगी रहती है।

कुछ ऐसा ही नजारा केजरीवाल अस्पताल का भी है। अस्पताल प्रबंधन ने एईएस पीड़ित बच्चों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था की है। इस अस्पताल में चार जून से अब तक नब्बे से अधिक बच्चों को इलाज के लिए भर्ती किया गया, इनमें से 20 बच्चों की मौत हो गई है।

कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके यहां हाल के सालों में पहले भी बच्चे इस बीमारी से पीड़ित रहे हैं। केजरीवाल अस्पताल में अपनी बच्ची का इलाज करा रहे मुज़फ़्फ़रपुर जिले के मोतीपुर प्रखंड के उमेश राय बताते हैं कि तीन साल पहले उनके लड़के को भी ऐसी ही बीमारी हुई थी।

उस समय उन्होंने उसका इलाज एक निजी नर्सिंग होम में कराया था। वहीं पूर्वी चंपारण जिले के निवासी अजय सिंह के परिवार के चार बच्चे इस बार इस अज्ञात बीमारी से पीड़ित हैं।

एसकेएमसीएच में अपनी नातिन का इलाज करा रहे अजय ने बताया कि चार बच्चों में से दो का इलाज अब भी चल रहा है। इनमें से एक की हालत गंभीर है। पिछले करीब 25 सालों से ऐसी बीमारी मुज़फ़्फ़रपुर और आस-पास जिलों के बच्चों को हर साल गर्मी में अपने चपेट में ले रही है।

एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर आरपी गुप्त बताते हैं, "यह बीमारी 1994 में एक महामारी के रूप में सामने आई थी। तब काफी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई थी।"

वह कहते हैं कि उसके बाद यह कभी महामारी के रूप में तो सामने नहीं आई। लेकिन हर साल गरीबों के बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं।

इस समय ज़िला प्रशासन का पूरा ध्यान इस बीमारी को लेकर लोगों को जागरूक करने की ओर है, जिससे यह ज़्यादा न फैले और अगर संभव हो तो मुज़फ़्फ़रपुर लाकर उनका इलाज किया जा सके। जिन बच्चों का इलाज मुज़फ़्फ़रपुर में हो रहा है उनके परिजन सरकारी व्यवस्था से संतुष्ट नज़र आते हैं। लेकिन सवाल यह है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों या जिला अस्पतालों में इनका इलाज क्यों नहीं हो पा रहा।


एक पीड़ित बच्चे के एक परिजन भोला राम कहते हैं कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाएं नहीं हैं, वहां दवाएं नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल जाने पर वहां से मुज़फ़्फ़रपुर भेज दिया जाता है। सीतामढ़ी से आए राम बाबू कहते हैं कि उनके गांव के आस-पास कोई सुविधा नहीं है। गांव से मुज़फ़्फ़रपुर नज़दीक पड़ता है तो वे यहां आ जाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed