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किसी भी मुस्लिम नेता से ज्यादा भरोसा मुसलमानों को मोदी पर है: शाहनवाज

Sat, 10 Oct 2015 08:07 PM IST
Updated Sat, 10 Oct 2015 08:07 PM IST
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Muslims have faith in Narendra Modi more than any other Muslim leader: Shahnawaz

बिहार में नेताओं की चुनावी भागदौड़ के बीच मुलाकात होती है भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन से बिहार चुनाव से जुड़े कुछ मुद्दों पर विनोद अग्निहोत्री की शाहनवाज हुसैन से बातचीत।

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भाजपा सवर्णों पिछड़ों अति पिछड़ों दलितों महादलितों की बात तो कर रही है, लेकिन बिहार केमुसलमानों को आपने ने क्यों छोड़ रखा है?

बिहार के मुसलमानों को लालू और नीतीश कुमार ने क्या दिया है। वो बताएं उन्होंने सिर्फ उसे भाजपा का डर दिखाया है। लोकसभा चुनावों में भी यही डर दिखाया था। लेकिन अब बिहार का मुसलमान इस बहकावे में आने वाला नहीं है। डेढ़ साल से केंद्र में मोदी सरकार है, लेकिन मुसलमानों को कोई परेशानी नहीं है। इसलिए अब बिहार का मुसलमान भी प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे के साथ है। नीतीश कुमार को बताना होगा कि उन्होंने बिहार के मुसलमानों में बंटवारा क्यों कर दिया। प्रधानमंत्री की रैलियों में भारी संख्या में मुसलमान आ रहे हैं। आज मुसलमानों को किसी भी मुस्लिम नेता से ज्यादा भरोसा नरेंद्र मोदी पर है।
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बिहार चुनावों भाजपा अपनी जीत को लेकर किस हद तक आश्वस्त है?

बिहार में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की जीत तय है। बिहार के लोग पिछले 25 सालों से लालू नीतीश राज देख चुके हैं। भागलपुर के दंगों के बाद हुए चुनाव में लालू यादव पर अल्पसंख्यकों ने भरोसा किया, क्योंकि उन्हें लगता था कि कांग्रेस ने उन्हें धोखा दिया है। 15 सालों तक लालू प्रसाद यादव की हुकूमत रही, लेकिन अल्पसंख्यकों को कुछ भी नहीं मिला। फिर लालू यादव का विरोध करके नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनें। शुरु में वह भाजपा केसाथ रहे। नीतीश ने जो वादे किए थे कि बिहार केलोगों को दवाई मिलेगी। पढ़ाई और नौकरी केलिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। कानून का राज होगा। लेकिन नीतीश हर मोर्चे पर विफल रहे। इसलिए बिहार की जनता अब भाजपा की तरफ देख रही है।
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'कम सीट के बावजूद बनाया सीएम'

Muslims have faith in Narendra Modi more than any other Muslim leader: Shahnawaz

नीतीश जब तक भाजपा के साथ रहे। आप उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे, अब उन्हें विफल बता रहे हैं?

नीतीश कुमार को पहली बार सन 2000 में भाजपा ने तब मुख्यमंत्री बनाया था, जब उनकी पार्टी की सीटें 37 और भाजपा की 67 थीं। बड़ा दल होने के बावजूद हमने यह फैसला बिहार के हित में किया था। 2005 में जब नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री बने तब वह जाति पांत से ऊपर उठकर दोबारा इस पद पर पहुंचे थे। लेकिन उन्होंने बिहार की जनता को अगड़े पिछड़े में ही नहीं बल्कि पिछड़ा अति पिछड़ा दलित महादलित में बांट दिया। यहां तक कि कलमा पढऩे वाले मुसलमानों में भी बंटवारा कर दिया। शिवानंद तिवारी जैसे उनके कुछ साथियों ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का सपना दिखा दिया और वह भूल गए कि जो व्यक्ति एक राज्य का भी पूरा नेता नहीं है, वह भारत जैसे देश का प्रधानमंत्री कैसे बन सकता है। लेकिन अपने सपने के चक्कर में नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के ख्वाब को तोड़ दिया। वह भाजपा से अलग होकर लालू यादव के साथ जा बैठे।

लेकिन नीतीश कुमार और लालू यादव का मिला जुला सामाजिक आधार क्या भाजपा और एनडीए के सामाजिक आधार पर भारी नहीं पड़ रहा है?

नीतीश कुमार के लिए लालू यादव के साथ जाना डूबते को तिनके का सहारा भर है। लालू यादव अब एक तिनके केबराबर ही रह गए हैं। मुसलमानों का भरोसा उन पर पहले से ही उठ चुका है अब जिस समाज से लालू यादव आते हैं उसने भी उन्हें छोड़ दिया है। उस समाज के लोग भारी संख्या में भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। भाजपा के साथ सभी समाजों केलोग जुड़ रहे हैं। हमारा नारा सबका साथ सबका विकास सबको भा रहा है।

'धर्म सीएम पद का पैमाना नहीं'

Muslims have faith in Narendra Modi more than any other Muslim leader: Shahnawaz

बिहार में भाजपा ने कोई बिहारी चेहरा क्यों नहीं दिया? चुनाव प्रचार के होर्डिंग्स पर भी सिर्फ नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तस्वीर है। जबकि महागठबंधन ने बिहारी स्वाभिमान को अपना नारा बना रखा है?

भाजपा को बिहार के नेताओं पर पूरा विश्वास है। साथ ही बिहार के नेताओं को प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष पर पूरा विश्वास है। हम उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं और काम कर रहे हैं। बिहार की जनता को नरेंद्र मोदी से बहुत उम्मीदे हैं। उनकी रैलियों में जिस तरह भीड़ उमड़ रही है यह इसका प्रमाण है। लोगों को लगता है कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे चाहेंगे वैसे बिहार का विकास होगा। जबकि नीतीश कुमार ने उनका अपमान किया। उनके सामने से थाली छीनने का काम किया। बिहार की जनता को मोदी सरकार के कामकाज पर यकीन है। फिर मुख्यमंत्री तो बिहारी ही होगा। हमने महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर में कहां मुख्यमंत्री का नाम बताया था।

फिर गिरिराज सिंह क्यों कह रहे हैं कि कोई सवर्ण मुख्यमंत्री नहीं होगा?

यह गिरिराज सिंह जी की अपनी राय है। पार्टी ने साफ किया है कि जाति धर्म मुख्यमंत्री का पैमाना नहीं होगा। संसदीय बोर्ड ही तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा।

चुनाव में जाति मुद्दा है या हिंदुत्व?

बिहार में सिर्फ विकास मुद्दा है। नरेंद्र मोदी जी का मूल मंत्र विकास है और भाजपा उसी मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। जबकि हमारे विरोधी मंडल पार्ट -दो का नारा दे रहे हैं। लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि मंडल केचैंपियन रामविलास पासवान, उपेंद्र कुशवाहा, जीतनराम मांझी हमारे साथ हैं। पिछड़े दलित महादलित नेतृत्व भाजपा केसाथ है।

मोहन भागवत के बयान से भाजपा को कितना नुकसान हो रहा है?

मोहन भागवत जी के बयान के बाद भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि आरक्षण की वर्तमान नीति ही जारी रहेगी। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी कह चुके हैं कि आरक्षण नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। भाजपा पिछड़े और वंचित वर्गों को विशेष अवसर दिए जाने के हक में है। हम जाति पांत की राजनीति नहीं करते हैं।


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