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बिहार के मुसलमानों में क्यों मची है उथल-पुथल?

Wed, 21 Mar 2018 11:55 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 21 Mar 2018 11:55 AM IST
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muslim peronal board organised deen bachao desh bacho rally, why unheavel raise in bihar's muslim

देश और दीन को बचाने के लिए रैली या कॉन्फ्रेंस की जरूरत नहीं है। लेकिन इसके बावजूद पटना में 15 अप्रैल को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और इमारत-ए-शरिया ने 'दीन बचाओ', 'देश बचाओ' सम्मेलन का आयोजन किया है। सच तो यह है कि इस तरह की गोलबंदी सिर्फ और सिर्फ आयोजन करते हैं। यह सच है कि सम्मेलन की तारीख की घोषणा 14 मार्च को बिहार और उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों के नतीजे आने से पहले की गई थी।

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यहां ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो ऐसे आयोजनों को बेकार मानते हैं। लोगों की समझ है कि बीजेपी ऐसे आयोजनों का फायदा ज्यादा उठाती है। हालांकि इस सम्मेलन के आयोजकों के अपने तर्क हैं। इनका कहना है कि बिहार में कई स्थानों पर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की गई है। गोरखपुर, फूलपुर और बिहार के अररिया लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार के बाद भागलपुर में सांप्रदायिक तनाव देखने को मिला। इससे पहले 1989 में भागलपुर भयावह दंगे की चपेट में आ चुका है।
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इन घटनाओं के नेपथ्य में कई चीजें सिलसिलेवार ढंग से हुई हैं। एक वीडियो वायरल हुआ जिसके बारे में बताया जा रहा है कि अररिया उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार सरफराज आलम की जीत के बाद आरजेडी समर्थक पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। हालांकि बाद में मीडिया में इस वीडियो की सत्यता पर भी सवाल उठे।
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इसके बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत के खिलाफ बिहार पुलिस ने सांप्रदायिक तनाव फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की। अर्जित ने 17 मार्च को भागलपुर शहर में हिन्दू नव वर्ष के मौके पर अनाधिकृत जुलूस निकाला था। हालांकि अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। 2015 में अर्जित भागलपुर शहर से बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

अर्जित के पिता और एक और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मामले में बिहार पुलिस के खिलाफ बयान दिया। अब इस मामले में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पूछा है कि झूठ कौन बोला रहा है- बिहार सरकार या केंद्रीय मंत्री। इसके साथ ही दरभंगा में भी तनाव पैदा करने की कोशिश की गई। दूसरी ओर एक ऐसी खबर फैलाई गई कि एक बीजेपी कार्यकर्ता के पिता राम चंद्र यादव की 15 मार्च की रात आरजेडी समर्थकों ने गांव में एक चौक का नाम नरेंद्र मोदी चौक रखने के कारण हत्या कर दी।

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हालांकि जिला पुलिस का कहना है कि हत्या भूमि विवाद में हुई है। यहां तक कि चौक के नाम की बात दो साल पुरानी है। ये घटनाएं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान दोनों को असहज करने वाली हैं। 19 मार्च को नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने जिस तरह से भ्रष्टाचार से समझौता नहीं किया है। उसी तरह से समाज में नफरत फैलाने वालों को भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

15 अप्रैल को पटना के गांधी मैदान में होने वाले इस सम्मेलन में तीन तलाक अहम मुद्दा होगा। यह सच्चाई है कि मुसलमान तीन तलाक बिल से सहमत नहीं हैं। खासकर पिछले शीतकालीन सत्र में जिस तरह से इस बिल को पास करने में जल्दबाजी दिखाई गई उसे लेकर लोगों की आपत्ति है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मुसलमान पुरुष और महिला पर्सनल बोर्ड और ऐमरात-ए-शरिया के रुख पर सवाल नहीं खड़ा कर रहे हैं।

मुसलमानों के बीच यह आम राय है कि संकट की घड़ी में संस्थाएं उनके असली मुद्दो को ठीक से नहीं उठा पाती हैं। ये संगठन इस्लामी न्यायशास्त्र की एक धारा 'हनफी' का प्रतिनिधित्व करते हैं। सच्चाई यह है कि पर्सनल लॉ बोर्ड और ऐमरात के भीतर ही असहमति की कई आवाजें हैं। इनकी कार्यप्रणाली को लेकर संस्था के भीतर ही असहमतियां हैं। 

मिसाल के तौर पर इदरा-ए-तहकीक-ओ-तसनीफ-ए-इस्लामी के सचिव रजी-उल-इस्लाम नदवी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में सड़कों पर मुस्लिम महिलाओं के विरोध करने के तौर-तरीकों पर सवाल खड़ा किया है। पर्सनल लॉ बोर्ड के भीतर ही मुसलमान बुद्धिजीवियों को लगता है कि तलाक-ए-बिद्दत जैसे मुद्दों को असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी का राजनीतिक मुद्दा बना दिया।

जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अरशद अजमल का मानना है कि जो इस तरह के अभियानों का नेतृत्व कर रहे हैं वो आज की असली राजनीति को समझ नहीं पा रहे हैं। बीजेपी नहीं चाहती है कि मुसलमान इस तरह के रोड शो करें और दूसरी पार्टियां ऐसा करने की स्थिति में हैं नहीं। संयोग से पटना के जिस फुलवारी शरीफ में ऐमरात-ए-शरिया है। वहीं एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर का परिवार मशहूर खानकाह से जुड़ा है। इनका कहना है कि इन मुद्दों को ओछी राजनीति का हिस्सा बना दिया गया है। उर्दू अखबार कौमी आवाज के नैयर फातमी कहते हैं, ''दीन और देश बचा हुआ है। पहले बीजेपी और बोर्ड के लोग ठीक हो जाए।''

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