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बेगूसराय: बिजली के करंट से 24 घंटे में दो मौतें, तीन साल की मासूम की मौत पर फूटा लोगों का गुस्सा

Sat, 10 Oct 2026 09:49 PM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Sat, 10 Oct 2026 09:49 PM IST
सार

बेगूसराय के बलिया नगर परिषद क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर करंट लगने से तीन वर्षीय माहिरा और 40 वर्षीय प्रमोद पोद्दार की मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने बिजली सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच और मुआवजे की मांग की।

 

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Two deaths due to electrocution in 24 hours; public outrage erupts over the death of a three-year-old child
शव के पास प्रदर्शन करते परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेगूसराय बिजली सुरक्षा में कथित लापरवाही ने बलिया नगर परिषद क्षेत्र में दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। महज 24 घंटे के भीतर करंट लगने की दो अलग-अलग घटनाओं में 40 वर्षीय प्रमोद पोद्दार और तीन वर्षीय मासूम माहिरा की मौत हो गई। एक ओर परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत से घर में मातम पसरा है, तो दूसरी ओर खेलती-कूदती बच्ची की जान जाने से लोगों में आक्रोश है। इन घटनाओं ने बिजली विभाग और नगर परिषद की सुरक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

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शिकायतों के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था, मासूम की चली गई जान!
बलिया नगर परिषद के वार्ड संख्या 22 में शनिवार को बिलाल मस्जिद के सामने तीन वर्षीय माहिरा खेलते-खेलते हाईमास्ट लाइट के बिजली के खंभे के संपर्क में आ गई। खंभे में करंट होने के कारण बच्ची उसकी चपेट में आ गई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। मासूम माहिरा, मो. सिकंदर की पुत्री थी।
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घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोग बच्ची के शव को लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंच गए और प्रदर्शन करते हुए मुआवजे की मांग की। लोगों का आरोप है कि बिजली के खंभे में करंट उतरने की शिकायत पहले भी कई बार की गई थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने समस्या का समाधान नहीं किया। यदि ये शिकायतें पहले की गई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई हुई? खंभे की जांच क्यों नहीं की गई? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए।
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घर के सामने करंट ने छीन लिया परिवार का सहारा
दूसरी दर्दनाक घटना वार्ड संख्या 24 के जानीपुर मोहल्ले में हुई। शुक्रवार शाम शिवजी पोद्दार के 40 वर्षीय पुत्र प्रमोद पोद्दार अपने घर के सामने करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रमोद अपने परिवार के प्रमुख सहारे थे। उनके पीछे तीन बेटियां और दो बेटे हैं। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर के सामने हुई इस घटना ने पूरे मोहल्ले को झकझोर दिया है।

दो मौतों के बाद भी जिम्मेदारी का सवाल कायम
लगातार दो हादसों में दो लोगों की मौत के बाद बिजली सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूरी हो गई है। खासकर हाईमास्ट लाइट के खंभे में करंट उतरने की कथित शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि शिकायतें किस अधिकारी या विभाग तक पहुंची थीं और उनके निवारण के लिए क्या कदम उठाए गए।

सार्वजनिक स्थानों पर लगे बिजली के खंभों की नियमित जांच, खुले तारों की मरम्मत और करंट से बचाव के इंतजाम नागरिकों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। किसी भी संभावित खतरे की शिकायत मिलने पर समय रहते कार्रवाई करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।


अब जांच और जवाबदेही का इंतजार
प्रमोद पोद्दार के शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया। वहीं, माहिरा के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है। बलिया की इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि बिजली सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग तथ्यों की जांच कर जवाबदेही तय करें और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।

 

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