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Bihar: CRPF जवान सदानंद सिंह पैतृक गांव में पंचतत्व में हुए विलीन, ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से हुआ था निधन

Sat, 12 Apr 2025 09:27 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 12 Apr 2025 09:27 PM IST
सार

Munger News: मुंगेर में CRPF जवान सदानंद सिंह का उनके पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके परिजनों और पूरे गांववालों की आंखें नम हो गईं। दरअसल, पश्चिम बंगाल में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया था। 

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Munger: CRPF jawan Sadanand Singh immersed in Panchtatva in ancestral village died of heart attack during duty
CRPF जवान सदानंद सिंह का उनके पैतृक गांव में किया गया अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश सेवा में समर्पित केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीआरपीएफ) के जवान सदानंद सिंह का पार्थिव शरीर जब शनिवार की सुबह उनके पैतृक गांव दरियापुर पहुंचा, तो गांव की फिजा गमगीन हो उठी। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में पदस्थापित सहायक अवर निरीक्षक (ASI) सदानंद सिंह का निधन गुरुवार को ड्यूटी के दौरान अचानक हुए हृदयाघात से हो गया था। शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ लालदरवाजा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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सैनिक सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
सीआरपीएफ के विशेष वाहन में जब जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो उनके साथ दो उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी और करीब एक दर्जन जवान भी मौजूद थे। जैसे ही गांववालों को अपने लाल के आगमन की सूचना मिली, वैसे ही बड़ी संख्या में लोग उनके घर पर उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंच गए। गांव की मिट्टी से जुड़ा यह जवान अब शांति की नींद सो गया, लेकिन उसके जाने की टीस हर आंख में साफ झलक रही थी।
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अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर एक बजे दरियापुर से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गार्डेन बाजार स्थित उनके ससुराल भी पहुंची। वहां ससुराल पक्ष के लोगों ने भी भावुक विदाई दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाजसेवी और स्थानीय प्रतिनिधि शामिल हुए। लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय जवान को अंतिम विदाई दी।

 
1991 में हुई थी सीआरपीएफ में नियुक्ति
सदानंद सिंह, दरियापुर निवासी दिवंगत दीपनारायण सिंह के पुत्र थे। उनकी सीआरपीएफ में नियुक्ति वर्ष 1991 में कांस्टेबल के रूप में हुई थी। लंबे सेवाकाल में उन्होंने देश की सेवा निष्ठा और ईमानदारी से की। वर्ष 1996 में उनका विवाह हुआ था। उनके तीन पुत्र हैं, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं। सदानंद के असमय निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी पत्नी और बच्चों की हालत बेहद दयनीय है।

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सदानंद सिंह के निधन से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा गांव शोक में डूब गया है। अंतिम संस्कार में शामिल अपर लोक अभियोजक मो. जहांगीर, पूर्व जिला परिषद सदस्य परवेज चांद, मुखिया प्रतिनिधि मो. फिरोज, पंचायत समिति सदस्य मो. सहरुद्दीन, संजय सिंह, मिलन कुमार सिंह और बबलू सिंह सहित कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

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