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Bihar News: नवनियुक्त एएनएम को मेडिकल सर्टिफिकेट में भारी परेशानी, दलालों की भूमिका से भड़के अभ्यर्थी
Wed, 04 Jun 2025 09:33 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखीसराय
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Wed, 04 Jun 2025 09:33 PM IST
सार
Lakhisarai News: नवनियुक्त अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ लोग जान-पहचान और पैसों के बल पर सर्टिफिकेट तुरंत हासिल कर रहे हैं, जबकि बाकियों को जानबूझकर टालमटोल किया जा रहा है। एक अभ्यर्थी ने बताया कि उससे खुलेआम पैसे की मांग की गई थी ताकि उसका सर्टिफिकेट जल्दी बन सके।
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सीएस कार्यालय के बाहर परेशान हुए नवनियुक्त एएनएम अभ्यर्थी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा 30 मई को जारी की गई एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) की नियुक्ति सूची के बाद लखीसराय जिले में चयनित अभ्यर्थियों के लिए योगदान प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है मेडिकल और फिजिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने की व्यवस्था। अभ्यर्थियों को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्थानीय सदर अस्पताल और सीएस (सिविल सर्जन) कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जहां व्यवस्था की कमी और विभागीय लापरवाही ने इसे अत्यंत कठिन बना दिया है।
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निजी लैब की जांच, सरकारी सुविधा के बावजूद खर्च का बोझ
सदर अस्पताल में ईसीजी सहित अन्य जांच की सुविधा होने के बावजूद अभ्यर्थियों को मजबूरी में निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। वहां 200 से 300 रुपये खर्च कर ईसीजी जांच करानी पड़ रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अस्पताल में उपकरण होने के बावजूद उन्हें यह सुविधा नहीं दी जा रही, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है।
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घंटों इंतजार, फिर भी सर्टिफिकेट नहीं
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी जब अभ्यर्थी सर्टिफिकेट के लिए सीएस कार्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। बुधवार को यह समस्या और विकराल हो गई, जब कई अभ्यर्थियों को पूरे दिन इंतजार के बाद भी सर्टिफिकेट नहीं मिला, जबकि कुछ लोगों को दलालों के माध्यम से तत्काल प्रमाणपत्र प्राप्त होता देखा गया।
दलाली और भेदभाव का आरोप, फूटा आक्रोश
अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ लोग जान-पहचान और पैसों के बल पर सर्टिफिकेट तुरंत हासिल कर रहे हैं, जबकि बाकियों को जानबूझकर टालमटोल किया जा रहा है। एक अभ्यर्थी ने बताया कि उससे खुलेआम पैसे की मांग की गई थी ताकि उसका सर्टिफिकेट जल्दी बन सके। पैसे न देने पर जानबूझकर देर की गई। इस घटना से गुस्साए अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने सीएस कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पत्रकारों से उलझे स्वास्थ्यकर्मी, हालात बने तनावपूर्ण
प्रदर्शन के दौरान जब कुछ पत्रकारों ने इस लापरवाही और भ्रष्टाचार को कैमरे में कैद करना चाहा, तो मौके पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों से बहस हो गई। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि स्थिति बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई। हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाते हुए सभी अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट जल्द निर्गत कर दिए। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और अभ्यर्थी शांत हुए। हालांकि इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक रवैये पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने राज्य सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता की सराहना करते हुए यह भी कहा कि अगर स्थानीय स्तर पर इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार होता रहा तो सरकार के प्रयास बेमानी हो जाएंगे। उन्होंने मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई और अभ्यर्थी ऐसी स्थिति का शिकार न हो।