बिहार: मुंगेर में चार फीट पानी में अर्थी लेकर पहुंचे परिजन, 20 दिन से बंद विद्युत शवदाह गृह ने बढ़ाई मुश्किल
मुंगेर के लाल दरवाजा श्मशान घाट पर गंगा का पानी फैलने से अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को करीब चार फीट गहरे पानी से होकर अर्थी ले जानी पड़ रही है। वहीं, नगर निगम का विद्युत शवदाह गृह पिछले करीब 20 दिनों से बंद है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
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मुंगेर शहर के लाल दरवाजा श्मशान घाट से चार फीट पानी के बीच अर्थी ले जाने का वीडियो सामने आया है। यह तस्वीरें शनिवार शाम की बताई जा रही है। घाट पर गंगा का पानी फैल जाने के कारण शव के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस दौरान हादसे का खतरा बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, लाल दरवाजा श्मशान घाट पर नगर निगम का विद्युत शवदाह गृह पिछले करीब 20 दिनों से बंद पड़ा है। बताया जा रहा है कि शवदाह गृह का एक पंखा खराब होने के कारण विद्युत शवदाह की सुविधा बंद है। ऐसे में लोगों को पारंपरिक तरीके से ही शव का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
यह रास्ता काफी जोखिम भरा बना हुआ
वर्तमान में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से करीब 43 सेंटीमीटर ऊपर बताया जा रहा है। गंगा का पानी घाट के आसपास फैल गया है। शवदाह स्थल तक पहुंचने के लिए परिजनों को करीब चार फीट गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। वीडियो में लोग अर्थी को पानी के बीच से लेकर जाते दिखाई दे रहे हैं। पानी का बहाव और गहराई देखते हुए यह रास्ता काफी जोखिम भरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के बावजूद अंतिम संस्कार के लिए लोगों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं कराया गया है। मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से शव लेकर श्मशान घाट पहुंच रहे हैं। वहीं, विद्युत शवदाह गृह बंद रहने से समस्या और गंभीर हो गई है।
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लोगों ने नगर निगम प्रशासन से विद्युत शवदाह गृह को अविलंब चालू कराने तथा श्मशान घाट तक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक सेवा के लिए लोगों को इस तरह जोखिम उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

अंतिम यात्रा भी बनी चुनौतीपूर्ण।