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बिहार: जमुई सदर अस्पताल में 12 घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत, शव रखकर परिजनों का हंगामा

Sun, 04 Oct 2026 07:55 PM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमुई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमुई Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Sun, 04 Oct 2026 07:55 PM IST
सार

जमुई सदर अस्पताल में 12 घंटे के भीतर दो प्रसूता महिलाओं की मौत के बाद परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन किया। मंत्री श्रेयसी सिंह ने इलाज व्यवस्था पर सवाल उठाए। जिला प्रशासन ने जांच समिति गठित कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी।

 

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Bihar News: two pregnant women death sadar hospital ruckus minister scolds doctors in jamui news
मृतका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जमुई सदर अस्पताल में 12 घंटे के भीतर दो प्रसूता महिलाओं की मौत के बाद रविवार को जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर शव रखकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही और ड्यूटी से महिला चिकित्सकों के गायब रहने का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह भी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने इलाज व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

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पहला मामला खैरा थाना क्षेत्र के नरियाना गांव की 28 वर्षीय अनिता कुमारी का है। उनके पति सुजीत कुमार के अनुसार, शनिवार रात प्रसव पीड़ा होने पर अनिता को पहले खैरा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से उन्हें जमुई सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। रात करीब 11 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद परिजनों का आरोप है कि प्रसव कक्ष में महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थीं। जांच के बाद चिकित्सक के आने की बात कही गई, लेकिन रातभर अनिता की हालत बिगड़ती रही। रविवार सुबह करीब पांच बजे उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, अनिता का यह तीसरा प्रसव था।

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दूसरा मामला चौहानडीह गांव की 26 वर्षीय आस्था कुमारी का है। परिजनों के अनुसार, शनिवार को सदर अस्पताल में ऑपरेशन से उनका प्रसव कराया गया था। उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। ऑपरेशन के बाद उनकी हालत सामान्य थी, लेकिन रात करीब 12 बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि उस समय महिला चिकित्सक ड्यूटी रूम में मौजूद नहीं थीं। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक के इलाज के बाद कुछ देर के लिए उनकी हालत में सुधार हुआ, लेकिन रविवार सुबह फिर तबीयत बिगड़ गई। करीब 10 बजे उनकी मौत हो गई।

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मंत्री ने इलाज व्यवस्था पर उठाए सवाल
घटना की सूचना मिलने पर अस्पताल पहुंचीं बिहार सरकार की खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अस्पताल उपाधीक्षक से इलाज व्यवस्था को लेकर सवाल किए।

मंत्री ने पूछा कि मरीज की स्थिति गंभीर होने के बावजूद उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया और महिला चिकित्सक को क्यों नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों पर भरोसा करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मंत्री ने कहा कि 12 घंटे के भीतर दो महिलाओं की मौत गंभीर मामला है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

जांच के बाद होगी कार्रवाई
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. थनीष कुमार ने बताया कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है। ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की पुष्टि होने पर संबंधित महिला चिकित्सक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल परिजनों की ओर से कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है।

वहीं, अंचलाधिकारी सौरभ कुमार भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों से लिखित आवेदन देने को कहा। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दी गई है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।



उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में जांच समिति गठित
प्रसव के दौरान भर्ती महिलाओं और नवजात शिशु की मौत से जुड़े मामले पर जिला पदाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। घटना के मूल कारणों, इलाज के दौरान चिकित्सकों की उपलब्धता और अनुपस्थिति तथा किसी भी स्तर पर हुई चिकित्सकीय या प्रबंधकीय लापरवाही की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।

उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित इस समिति में सिविल सर्जन और वरीय उप समाहर्ता सावन कुमार को सदस्य बनाया गया है। जिला पदाधिकारी ने जांच समिति को प्राथमिकता के आधार पर पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

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