Bihar News: राज्यस्तरीय खो-खो प्रशिक्षण शिविर का भव्य शुभारंभ, 18 जिलों के खिलाड़ी ले रहे भाग; जानें
Bihar: खो-खो एसोसिएशन बिहार के महासचिव नीरज कुमार पप्पू ने जानकारी दी कि पहली बार बिहार को खेलो इंडिया अंडर-18 बालक-बालिका खो-खो चैंपियनशिप की मेजबानी मिली है, जो राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर में 18 जिलों से चयनित 25 बालक एवं 25 बालिका खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।
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खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 के अंतर्गत बिहार राज्य स्तरीय खो-खो प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत शनिवार को मुंगेर के इनडोर स्टेडियम में की गई। उद्घाटन समारोह का शुभारंभ सदर अनुमंडल पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह एवं बिहार खो-खो एसोसिएशन के महासचिव नीरज कुमार पप्पू ने पारंपरिक नारियल फोड़कर किया।
इस अवसर पर एसडीओ शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा, “खेलों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लगातार प्रयास कर रही हैं। ऐसे प्रशिक्षण शिविरों से दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ी लाभांवित होते हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।” उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण शिविर 12 अप्रैल से 3 मई तक चलेगा, जिसमें बालक एवं बालिका वर्ग के प्रतिभागियों को विशेषज्ञ कोच द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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खो-खो एसोसिएशन बिहार के महासचिव नीरज कुमार पप्पू ने जानकारी दी कि पहली बार बिहार को खेलो इंडिया अंडर-18 बालक-बालिका खो-खो चैंपियनशिप की मेजबानी मिली है, जो राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर में 18 जिलों से चयनित 25 बालक एवं 25 बालिका खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। इन खिलाड़ियों को चार अनुभवी कोच द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण उपरांत, इनमें से 15-15 खिलाड़ी मई माह में गया जिले में होने वाली नेशनल खो-खो चैंपियनशिप में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
खिलाड़ियों में दिखा उत्साह
मुंगेर, बेगूसराय, बांका, गोपालगंज, गया, नालंदा समेत कई जिलों से आए खिलाड़ियों ने प्रशिक्षण शिविर को लेकर उत्साह जताया। उन्होंने कहा कि मुंगेर में प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्हें काफी कुछ नया सीखने को मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण स्तर पर खेलों के आयोजन से युवाओं में जागरूकता बढ़ी है। खिलाड़ियों ने सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना की भी सराहना की, जिसके तहत कई खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में अवसर प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजनाएं खिलाड़ियों को न केवल प्रेरित करती हैं, बल्कि उनके भविष्य को भी सुरक्षित बनाती हैं।