फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Makhana got GI tag, but business did not expand as expected in Darbhanga; Farmers upset due to low prices

Bihar: मखाना को GI टैग तो मिला, पर आशा के अनुरूप व्यापार में नहीं हुआ विस्तार; कम कीमत मिलने से किसान परेशान

Mon, 11 Sep 2023 03:11 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Mon, 11 Sep 2023 03:11 PM IST
सार

Bihar News: मखाना किसानों की आशा के अनुरूप कीमतों में वृद्धि नहीं हो पाई है। इसका मुख्य कारण वर्ष 2022 के मखाने की कीमत में अप्रत्याशित कमी रही है। इस कारण से मखाना की खेती के प्रति किसानों का उत्साह कम हो गया है। लेकिन इस वर्ष फिर से मखाना की कीमत तेजी से बढ़ी है, जिससे मखाना की किसानों की रुचि फिर से बढ़ने की उम्मीद जगी है। 

विज्ञापन
Makhana got GI tag, but business did not expand as expected in Darbhanga; Farmers upset due to low prices
मखाना की कम कीमत मिलने से किसान परेशान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार ने मिथिला के मखाना को जीआई टैग तो दे दिया है। वहीं, जीआई टैग मिलने से मखाना व्यवसाय से जुड़े लोग काफी उत्साहित भी थे। उन्हें उम्मीद थी कि मखाना व्यवसाय को नया आयाम मिलेगा। लेकिन ऐसा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसा मानना है मखाना व्यवसाय से जुड़े लोगों का। मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों को उत्पादन के अनुरूप कीमत नहीं मिल पा रही है। अभी दरभंगा में मखाने का खुदरा बाजार मूल्य 400 से 500 रुपये प्रति किलो है।

विज्ञापन


मखाना किसानों की आशा के अनुरूप कीमतों में वृद्धि नहीं हो पाई है। इसका मुख्य कारण वर्ष 2022 के मखाने की कीमत में अप्रत्याशित कमी रही है। इस कारण से मखाना की खेती के प्रति किसानों का उत्साह कम हो गया है। लेकिन इस वर्ष फिर से मखाना की कीमत तेजी से बढ़ी है, जिससे मखाना की किसानों की रुचि फिर से बढ़ने की उम्मीद जगी है। 
विज्ञापन


दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर मनोज कुमार का मानना है कि पिछले पांच वर्षों में मखाना की खेती का विस्तार दोगुना हो गया है। जीआई टैग मिलने और जरूरी अनुसंधान में त्वरित विकास से लंबी अवधि में मखाना की खेती का और विस्तार होगा। यह किसानों को बेहतर आमदनी देने में सक्षम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
पांच वर्ष पहले जिले में मखाने की खेती लगभग 15 हजार हेक्टेयर में होती थी, जो अब 30 से 35 हजार हेक्टेयर में हो रही है। इसकी उत्पादकता इस दौरान 14 से 15 कुंटल प्रति हेक्टेयर हुआ करती थी, जो अब बढ़कर 20 से 25 कुंटल तक हो गई है। अब किसानों की आमदनी प्रति हेक्टेयर 50 से 60 हजार से बढ़कर एक लाख 25 हजार से डेढ़ लाख तक अनुमानित है। मखाना किसानों और उद्यमियों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है।


बहादुरपुर प्रखंड के कपछाही गांव के किसान महेश मुखिया और बेनीपुर की मखाना किसान कंचन कुमारी ने बताया कि पिछले साल मखाना की गुड़ी की कीमत काफी कम थी। इस बार गुड़ी की कीमत अधिक है। लेकिन उत्पादन पर असर पड़ा है। इसके पीछे प्रतिकूल मौसम मुख्य वजह रही है। इस वर्ष मई, जून और जुलाई में भीषण गर्मी रही और बारिश औसत से काफी कम है। अभी थोक विक्रेता तीन हजार रुपये प्रति कुंटल मखाना की बिक्री कर रहे हैं। जबकि खुदरा विक्रेता 400 से 500 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं। मखाना के कारोबार से जिले के करीब 30 हजार किसान जुड़े हुए हैं। इसकी खेती के लिए उद्यान विभाग एक लाख रुपये अनुदान भी देता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed