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Supreme Court : ईवीएम-वीवीपैट पर सुप्रीम फैसले के बाद सम्राट ने याद किया बूथ लूट का जमाना, राजद को घेरा
Fri, 26 Apr 2024 08:50 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Fri, 26 Apr 2024 08:50 PM IST
सार
Bihar : सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि 1990 से लेकर 2004 तक बैलेट पेपर के माध्यम से हुए लोकसभा, विधानसभा और पंचायत के कुल 9 चुनावों में हुए हिंसक घटनाओं में 641 लोग मारे गए थे।
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सम्राट चौधरी।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही राजद पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपेट को लेकर दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर बूथ लूट कर चुनाव जीतने के विपक्ष के मंसूबे को ध्वस्त कर दिया है। ईवीएम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार में राजद जैसे दल के मतपेटियां लूटने वालों को करारा जवाब मिला है। उन्होंने कहा कि डेढ़ दशक तक बिहार में बूथ लूट और चुनाव के दौरान हिंसा का नंगा खेल खेलने वाले राजद ने अन्य विपक्षी दलों के साथ पिछले कई वर्षों से अभियान चला कर ईवीएम को बदनाम किया है, जबकि भारत के चुनाव सिस्टम की दुनिया में तारीफ हो रही है।
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1990 से लेकर 2004 तक गिनाये हत्या और बूथ लूट की कहानी
सम्राट चौधरी ने कहा कि आज राजद अपने दौर के बूथ लूट और चुनावी हिंसा को भूल गया है। 1990 से लेकर 2004 तक बैलेट पेपर के माध्यम से हुए लोकसभा, विधानसभा और पंचायत के कुल 9 चुनावों में हुए हिंसक घटनाओं में 641 लोग मारे गए थे। 2000 के विधानसभा चुनाव में 39 स्थानों पर फायरिंग हुई थी तथा चुनावी हिंसा में 61 लोग मारे गए थे। 1990 में 87 तथा 1999 में 76 लोग चुनावी हिंसा के शिकार हुए थे। 2001 के पंचायत चुनाव में 196 लोगों की अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
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लालू समय में पुनर्मतदान कराए जाने की वजह भी बताई
सम्राट चौधरी ने कहा कि 1998 के लोकसभा चुनाव में राजद के दो दर्जन मंत्री, विधायकों पर बूथ लूट, हिंसा और मतदान में बाधा उत्पन्न करने के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। बिहार देश का अकेला ऐसा राज्य था, जहां चुनावी हिंसा और बूथ लूट के कारण सर्वाधिक पुनर्मतदान कराने की नौबत आती थी। बड़े पैमाने पर बूथ-लूट और हिंसा का ही नतीजा था कि 2004 में छपरा लोकसभा क्षेत्र जहां से लालू प्रसाद चुनाव लड़ रहे थे तथा 90 के दशक में पूर्णिया और दो-दो बार पटना लोकसभा का चुनाव स्थगति करना पड़ा था। 1995 के बिहार विधान सभा चुनाव में बूथ लूट की व्यापक शिकायत पर ही 1668 मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान कराना पड़ा था।
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सम्राट ने बताये कैसे निकलते थे बोतल से जिन्न
2005 में एनडीए की सरकार आने के पहले हर चुनाव में बूथ लूट, हिंसा, मारपीट, बैलेट बॉक्स की छीना झपटी, बक्शे में स्याही डालने की घटना आम थी। आम मतदाता से लेकर मतदानकर्मी तक चुनाव से डरे-सहमे रहते थे। राजद-कांग्रेस बूथ लूट के जरिए ही अपनी चुनावी जीत सुनिश्चित करते थे और लालू इसी को बोतल से जिन्न निकलना बताते थे। ईवीएम से होने वाले चुनाव की पारदर्शिता के बाद न केवल इनकी लूट पर रोक लगी बल्कि इनका चुनावी ग्राफ भी नीचे चला गया। झूठे आरोप लगा कर ईवीएम का इसलिए विरोध कर रहे हैं ताकि एक बार फिर चुनावी हिंसा के जरिए जंगल राज कायम किया जा सके।