आखिर क्यों नीतीश कुमार के लिए 'प्रतिष्ठा' का विषय बन चुकी हैं भागलपुर समेत बिहार की ये पांचों सीटें?
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लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत बिहार की पांच लोकसभा सीटों पर आज मतदान है। इनमें भागलपुर, बांका, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया सीटें शामिल है। दिलचस्प यह है कि एनडीए गठबंधन में हुए सीटों के बंटवारे के अनुसार ये सारी सीटें जदयू के खाते में गई है। किशनगंज और पूर्णिया तो ठीक, लेकिन भाजपा के बड़े वोट बैंक वाली भागलपुर, कटिहार और बांका लोकसभा सीटों पर जदयू की उम्मीदवारी ने सीट बंटवारे के समय सबको हैरान कर डाला था।
सबसे ज्यादा आश्चर्य भागलपुर से भाजपा प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन का टिकट कटने को लेकर हुआ था। इन सभी सीटों पर महागठबंधन से जदयू का सीधा मुकाबला है। ऐसे में दूसरे चरण की ये पांचों सीटें नीतीश कुमार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
पांचों सीटों की उम्मीदवारी पर एक नजर
दूसरे चरण की पांचों सीटों पर जदयू के मुखिया नीतीश कुमार ने अपने विश्वासपात्रों को मैदान में उतारा है। भागलपुर से जदयू ने नाथनगर विधायक अजय कुमार मंडल को पहली बार लोकसभा के रण में उतारा है। उनका मुकाबला राजद प्रत्याशी और निवर्तमान सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल से है।
बांका सीट पर जदयू ने बेलहर विधायक गिरधारी यादव को उतारा है। सांसद रह चुके गिरधारी की टक्कर निवर्तमान सांसद और राजद के कद्दावर नेता जयप्रकाश नारायण यादव और भाजपा की बागी नेता और और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की पत्नी पुतुल कुमारी से है। जदयू ने किशनगंज सीट से मो अशरफ को उम्मीदवार बनाया है, जिनका मुकाबला पूर्व मंत्री मोहम्मद हुसैन आजाद के बेटे और किशनगंज के विधायक डॉ. मोहम्मद जावेद से होगा। वह कांग्रेस प्रत्याशी हैं।
कटिहार लोकसभा सीट से पूर्व मंत्री दुलालचंद गोस्वामी जदयू प्रत्याशी हैं, जिनका मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी और निवर्तमान सांसद तारिक अनवर से होगा। अनवर तीन बार के सांसद रहे भाजपा उम्मीवार निखिल चौधरी को हरा कर सांसद बने थे। वहीं, पूर्णिया से जदयू ने निवर्तमान सांसद संतोष कुमार कुशवाहा पर भरोसा जताया है, जिनकी टक्कर भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व सासंद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह से होगी।
इन सियासी फैक्टरों को नकारा नहीं जा सकता
पांचों सीटों पर नीतीश कुमार के लिए चुनौतियां कम नहीं है। एनडीए के बागी उम्मीदवार उनके लिए अलग संकट पैदा कर सकते हैं। भागलपुर, कटिहार और बांका सीट पर क्रमश: शाहनवाज हुसैन, निखिल चौधरी और पुतुल कुमारी को टिकट नहीं मिलने से भाजपा समर्थकों के एक हिस्से में जदयू के प्रति खीझ है। शाहनवाज ने तो अपने टिकट कटने का ठीकरा सीधे तौर पर जदयू पर फोड़ दिया था, जिसके बाद नीतीश कुमार ने भी पलटवार किया था।
भागलपुर के लिए चुनावी सभाएं कवर कर रहे नवगछिया के स्थानीय पत्रकार ऋषव मिश्रा कृष्णा ने कुछ दिलचस्प वाकये बताए। जैसे कि नीतीश कुमार ने भागलपुर लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा सभाएं की। सभाओं के दौरान उन्होंने बिना नाम लिए चेताया कि हमको पता है, कौन सब गड़बड़ कर रहे हैं, बात बिगड़ी तो चुनाव बाद कहीं के नहीं रहेंगे। ऋषव के अनुसार नीतीश का इशारा शाहनवाज और उनके समर्थकों की तरफ था।
2014 में नहीं दिखी थी मोदी लहर, इस बार जदयू की घर वापसी
2014 में बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर भाजपा ने लोजपा और रालोसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जबकि जदयू अपने दम पर मैदान में थी। भाजपा ने 30 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 22 में जीत हासिल हुई थी, वहीं लोजपा सात में से छह और रालोसपा तीन में से सभी तीन सीटें जीतने में कामयाब रही थी। इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद आज जिन पांच सीटों पर मतदान हो रहे हैं, उनमें से किसी पर भी मोदी लहर का जादू नहीं दिखा था।
यहां तक कि भागलपुर में भी शाहनवाज, राजद के विधायक 'मेटेरियल' उम्मीदवार बुलो मंडल से हार गए थे। साल 2017 में बिहार की राजनीतिक फिजा बदली और जदयू ने एनडीए में घर वापसी कर ली है। भाजपा ने इस बार उन आठ में से पांच सीटों को जदयू के लिए छोड़ दिया, जिन पर पिछले चुनाव में वह हार गई थी। हालांकि इनमें से पूर्णिया में जदयू ने ही भाजपा को हराया था।
साख बचाने को नीतीश कुमार ने की रिकॉर्डतोड़ सभाएं
दूसरे चरण की पांचों सीटों के लिए 100 से ज्यादा रैलियां हो चुकी है। सभी राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारकों की बात करें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिकॉर्डतोड़ सबसे ज्यादा 30 जनसभाएं की। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव 21 रैलियां कर दूसरे नंबर पर रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भागलपुर के हवाई अड्डा मैदान में विशाल जनसभा कर चुके हैं। हालांकि यह भागलपुर, बांका और मुंगेर, तीनों लोकसभा सीटों के लिए संयुक्त रैली थी।
सुशील मोदी की 12, असदुद्दीन ओवैसी की 11, रालोसपा सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा की आठ और पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की छह रैलियां हुई। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धु और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दो-दो जनसभाएं की। इस तरह देखा जाए तो सबसे ज्यादा जदयू के मुखिया नीतीश कुमार ने रैलियां की और अपनी साख बचाने को कोई कसर नहीं छोड़ी।