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बिहार : स्वास्थ्य मंत्री के सामने ही तीन बच्चों ने तोड़ा दम, दिमागी बुखार से अब तक 100 की मौत

Mon, 17 Jun 2019 05:07 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Nilesh Kumar Updated Mon, 17 Jun 2019 05:07 AM IST
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Live update: Death toll due to Acute Encephalitis Syndrome rises, Health Minister Dr Harshwardhan
Central health Minister Dr. Harshwardhan and Ashwini Chaubey in Muzaffarpur - फोटो : ANI

बिहार के मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार से अब तक 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। रविवार को मुजफ्फरपुर के एसके मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के सामने ही तीन मासूम बच्चों ने दम तोड़ दिया। इनमें निशा और मुन्नी की उम्र 5 साल और एक अन्य बच्चा शामिल है। इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिमागी बुखार से मरने वाले बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजे का एलान किया है।

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दिमागी बुखार से निपटने और हालत का जायजा लेने बिहार पहुंचे हर्षवर्धन को एसकेएमसीएच केडॉक्टर बच्चों के संबंध में बता ही रहे थे तभी मुन्नी की मां दहाड़ मारकर रोने लगी। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी मौजूद थे।
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तीन बच्चों की मौत से परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज परिजन अस्पताल से निकलते समय चौबे का हाथ पकड़कर बच्चे के पास ले जाने लगे। इससे वहां हंगामा शुरू हो गया। पुलिस ने परिजनों पर बल प्रयोग कर मंत्री को सुरक्षित बाहर निकाला।

अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरपुर समेत राज्य के 12 जिलों में इस बीमारी का कहर लगातार बढ़ रहा है। एसकेएमसीएच में अब तक 85 बच्चों की जान जा चुकी है। इनमें से ज्यादातर की उम्र 10 वर्ष से कम है। बच्चों के हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल के बिल्कुल कम होने) और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के शिकार होने के कारण मौत हो रही है।

एक साल में शुरू होगा रिसर्च सेंटर : हर्षवर्धन
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से दोबारा इतने बच्चों की मौत न हो इसके लिए लगातार प्रयास और शोध होगा। बिहार के 5 जिलों में वायरोलॉजी लैब बनाने की जरूरत है। एईएस की रोकथाम के लिए मुजफ्फरपुर में उच्च तकनीक का रिसर्च सेंटर बनेगा। यह काम एक साल में पूरा करने का निर्देश दिया गया है। भारत सरकार इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करेगी। उन्होंने एसकेएमसीएच के आइसीयू पर नाराजगी जतायी और कहा कि यहां कम से कम 100 बेड का नया आईसीयू बनना चाहिए।


एम्स के निदेशक बोले- केंद्र सरकार के साथ हैं प्रयासरत  
एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम पर एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि दुर्भाग्यवश बिहार में इंसेफलाइटिस आम हो गया है और इसको लेकर कई रिसर्च भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल हमारा मकसद इससे हो रही मौतों पर नियंत्रण पाना है। एम्स और केंद्र सरकार दोनों तैयार हैं और स्वास्थ्य सुविधा की आधारभूत संरचनाओं के विकास में लगे हुए हैं।


'डॉक्टर हैं नहीं, नर्सों के भरोसे छोड़ा'
केंद्रीय मंत्रियों के दौरे से पहले मुजफ्फरपुर अस्पताल में भर्ती एक बच्चे के पिता ने कहा कि यहां स्थिति बदहाल है। डॉक्टर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हर घंटे बच्चों की मौत हो रही है। आधी रात के बाद से डॉक्टर नहीं हैं, केवल नर्सों की ड्यूटी लगा दी गई है। 

मंत्री ने भी माना- बेड की है कमी
बिहार सरकार में नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार से हो रही मौतों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार शुरुआत से काम कर रही है। यहां दवाओं की भी कोई कमी नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि फिलहाल जो आपातकालीन स्थिति बन पड़ी है, उसके अनुसार आईसीयू और बेड की कमी है। 

 

पांच जिले प्रभावित, जानें लक्षण दिखते ही क्या करना चाहिए

Live update: Death toll due to Acute Encephalitis Syndrome rises, Health Minister Dr Harshwardhan
बिहार में दिमागी बुखार का कहर - फोटो : PTI

कहां-कहां है बीमारी का प्रकोप?

डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का प्रकोप उत्तरी बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी और वैशाली जिले में सबसे ज्यादा है। अस्पताल पहुंचने वाले पीड़ित बच्चे इन्हीं जिलों से हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रभावित जिलों के सभी डॉक्टर्स और जिला प्रशासन ने पीड़ितों को सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा है। राज्य के स्वास्थ्य सचिव पूरे मामले पर नजर रख रहे हैं।

क्या हैं लक्षण?

एक्यूट इंसिफेलाइटिस सिंड्रोम और जापानी इंसिफेलाइटिस को उत्तरी बिहार में चमकी बुखार के नाम से जाना जाता है। इससे पीड़ित बच्चों को तेज बुखार आता है और शरीर में ऐंठन होती है। इसके बाद बच्चे बेहोश हो जाते हैं। मरीज को उलटी आने और चिड़चिड़ेपन की शिकायत भी रहती है।

बीमारी अगर बढ़ जाए तो ये लक्षण नजर आते हैंः

  • बिना किसी बात के भ्रम पैदा होना
  • दिमाग संतुलित न रहना
  • पैरालाइज हो जाना
  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • बोलने और सुनने में समस्या
  • बेहोशी आना

श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर साहनी का कहना है कि इस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012 में इस बुखार से 120 बच्चों की मौत हुई थी।

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