{"_id":"62dbd605b0d4a731c92757e5","slug":"liquor-ban-jitan-ram-manjhi-raises-questions-on-prohibition-says-drink-alcohol-not-wrong","type":"story","status":"publish","title_hn":"Liquor Ban: 'बड़े लोगों की तरह चालाकी से शराब का आनंद लेना सीखें', जीतन राम मांझी ने शराबबंदी पर साधा निशाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Liquor Ban: 'बड़े लोगों की तरह चालाकी से शराब का आनंद लेना सीखें', जीतन राम मांझी ने शराबबंदी पर साधा निशाना
Sat, 23 Jul 2022 04:35 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 23 Jul 2022 04:35 PM IST
सार
बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने कहा है कि लोगों को बड़े लोगों से चालाकी से शराब का आनंद लेने की कला सीखनी चाहिए, जो चुपचाप रात में एक-आध पैग का आनंद लेते हैं और सो जाते हैं और इसलिए कभी पकड़े नहीं जाते।
विज्ञापन
जीतन राम मांझी
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी (Liquor Ban) की नीति पर सवाल उठाया है। साथ ही उन्होंने नीतीश सरकार (Nitish Govt) को इसकी समीक्षा करने की भी सलाह दी है। उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पंद्रहवीं बार पेश किए गए शराबबंदी कानून (Liquor Ban Act) पर हमला करते हुए कहा कि रात को बड़े लोग शराब पीकर चुपचाप सो जाते हैं तो प्रतिष्ठित कहलाते हैं जबकि हमारे लोग एक पाउच पी लेते हैं और सड़क पर चले आते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होती है। ये पहली बार नहीं है जब नीतीश सरकार की शराब बंदी पर सवाल उठा हो, इससे पहले भी कई बार इसे लेकर सवाल खड़े हो चुके हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ये गलत हो रहा है। इस पर विचार होना चाहिए। आगे उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि लोगों को बड़े लोगों से चालाकी से शराब का आनंद लेने की कला सीखनी चाहिए, जो चुपचाप रात में एक-आध पैग का आनंद लेते हैं और सो जाते हैं और इसलिए कभी पकड़े नहीं जाते।
मजदूर का दिया उदाहरण
इस दौरान उन्होंने एक मजदूर का हवाला देते हुए कहा कि अभी हाल ही में एक मजदूर मजदूरी करके वापस आ रहा था और शराब पी ली थी। जिसके बाद वह नशे में सड़क पास बैठा हुआ था, तभी कुछ पुलिसकर्मी आए और ब्रेथ एनालाइजर लगाकर शराब की पुष्टि की और फिर उसे जेल में भेज दिया। ये पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जो पहुंच वाले हैं, वह पैसों के बल पर बच जाते हैं, ये सही नहीं है और गरीब को परेशान करना भी उचित नहीं है।
विज्ञापन
शराब पीना गलत नहीं
इस दौरान उन्होंने अखबार के लेखों का हवाला देते हुए आगे कहा कि एक या दो पेय का आनंद लेने में कुछ भी गलत नहीं है। मांझी ने कहा कि शराब को शराब की तरह नहीं, बल्कि दवा के रूप में लेना चाहिए। गरीब, मजदूर, चाहे वे किसी भी जाति के हों, एक दिन की कड़ी मेहनत के बाद आराम करने की जरूरत है। अपनी हठधर्मिता के कारण वे बदनाम हो जाते हैं। यदि वे सीमित मात्रा में पीने के बाद संयमित व्यवहार करना सीखें तो ये गलत नहीं होगा।
गौरतलब है कि बिहार में अप्रैल 2016 से शराब की बिक्री और खपत पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य की महिलाओं से नीतीश कुमार के वादे के बाद ये कदम उठाया गया था। नीतीश सरकार का दावा है कि समाज पर इसका प्रभाव क्रांतिकारी रहा है। शराब पर खर्च किए गए पैसे को बचाकर लोग अपने जीवन स्तर में सुधार कर रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने आगे कहा कि ये गलत हो रहा है। इस पर विचार होना चाहिए। आगे उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि लोगों को बड़े लोगों से चालाकी से शराब का आनंद लेने की कला सीखनी चाहिए, जो चुपचाप रात में एक-आध पैग का आनंद लेते हैं और सो जाते हैं और इसलिए कभी पकड़े नहीं जाते।
विज्ञापन
मजदूर का दिया उदाहरण
इस दौरान उन्होंने एक मजदूर का हवाला देते हुए कहा कि अभी हाल ही में एक मजदूर मजदूरी करके वापस आ रहा था और शराब पी ली थी। जिसके बाद वह नशे में सड़क पास बैठा हुआ था, तभी कुछ पुलिसकर्मी आए और ब्रेथ एनालाइजर लगाकर शराब की पुष्टि की और फिर उसे जेल में भेज दिया। ये पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जो पहुंच वाले हैं, वह पैसों के बल पर बच जाते हैं, ये सही नहीं है और गरीब को परेशान करना भी उचित नहीं है।
विज्ञापन
शराब पीना गलत नहीं
इस दौरान उन्होंने अखबार के लेखों का हवाला देते हुए आगे कहा कि एक या दो पेय का आनंद लेने में कुछ भी गलत नहीं है। मांझी ने कहा कि शराब को शराब की तरह नहीं, बल्कि दवा के रूप में लेना चाहिए। गरीब, मजदूर, चाहे वे किसी भी जाति के हों, एक दिन की कड़ी मेहनत के बाद आराम करने की जरूरत है। अपनी हठधर्मिता के कारण वे बदनाम हो जाते हैं। यदि वे सीमित मात्रा में पीने के बाद संयमित व्यवहार करना सीखें तो ये गलत नहीं होगा।
गौरतलब है कि बिहार में अप्रैल 2016 से शराब की बिक्री और खपत पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य की महिलाओं से नीतीश कुमार के वादे के बाद ये कदम उठाया गया था। नीतीश सरकार का दावा है कि समाज पर इसका प्रभाव क्रांतिकारी रहा है। शराब पर खर्च किए गए पैसे को बचाकर लोग अपने जीवन स्तर में सुधार कर रहे हैं।