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भागलपुर दंगे के दोषियों की सजा बरकरार

Thu, 15 Oct 2015 10:03 PM IST
Updated Thu, 15 Oct 2015 10:03 PM IST
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Life term for 10 in Bhagalpur riots case

भागलपुर दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा पाए 10 अभियुक्तों की सजा पटना हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। हालांकि इनमें से दो की मौत हो चुकी है।

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न्यायमूर्ति समरेंद्र प्रताप सिंह की खंडपीठ ने मामले पर लंबी सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे बृहस्पतिवार को सुनाया गया। इस फैसले के बाद रामदेव मंडल, अर्जुन मंडल, प्रभात मंडल और नरेश मंडल सहित आठ लोग उम्रकैद की सजा भुगतेंगे।
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इसके अलावा कोर्ट ने सुभाष मंडल और यदू मंडल को राहत देते हुए बरी कर दिया है। 1989 के भागलपुर दंगे में इन लोगों को दोषी करार देते हुए भागलपुर कोर्ट ने 2007 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस आदेश के विरुद्ध इन्होंने पटना हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिस पर शुक्रवार को यह फैसला आया है।

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1989 में भागलपुर ‌हुआ था दंगा

Life term for 10 in Bhagalpur riots case

26 अक्टूबर 1989 को भागलपुर दंगे में लोगाय कांड हुआ था। इसमें 116 लोग मारे गए थे। इस केस में भागलपुर जिला कोर्ट से 14 लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी, जिनमें एक दारोगा समेत दो लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

12 लोगों की अपील हाईकोर्ट में चल रही थी। जिसमें दो को कोर्ट ने बरी कर दिया और शेष की सजा बरकरार रखी है। बता दें कि भागलपुर दंगे की शुरुआत 24 अक्टूबर 1989 को हुई थी।

राम शिला पूजन के दौरान यह दंगा शुरू हुआ था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दंगे में 1161 लोग मारे गए थे, लेकिन गैरसरकारी आंकड़े यह संख्या दो हजार से भी ज्यादा बताते हैं। इस दंगे में भयानक लुगाई कांड भी हुआ था। जिसमें 61 लोगों को सुरक्षा देने के नाम पर ले जाया गया और सब की हत्या कर दी गई।

इसकी जांच के लिए बनी न्यायमूर्ति एनएन सिंह जांच आयोग ने 28 फरवरी, 2015 को रा’य सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। रा’य सरकार ने आखिरी सत्र के अंतिम दिन बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में दंगा जांच आयोग की रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में भागलपुर के तत्कालीन ग्रामीण एसपी शीलवर्धन सिंह समेत 126 अधिकारियों को दोषी ठहराया गया।

शीलवर्धन सिंह 1989 में हुए इस दंगे के दौरान ग्रामीण एसपी थे और वर्तमान में ये केंद्र सरकार में पद स्थापित हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए रा’य सरकार ने केंद्र सरकार को लिखा है। इस दंगे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उस दौरान कई माह तक दंगे हुए और सैकड़ों लोगों की हत्या की गई।

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