अंतिम चरण तय करेगा बिहार की ताजपोशी
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बिहार विधानसभा चुनाव में अंतिम चरण के तहत 9 जिलों की 57 सीटों पर 5 नवंबर को पड़ने वाले वोट बिहार की ताजपोशी का फैसला करेंगे। फिलहाल आमने-सामने की लड़ाई में उलझे राजग और महागठबंधन दोनों का मानना है कि बीते चार चरणों का मुकाबला करीब करीब बराबरी पर छूटा है।
अंतिम चरण के इलाकों में यादवों और मुसलमानों की अच्छी संख्या होने के कारण महागठबंधन की उम्मीदें राजद सुप्रीमो के करिश्मे और मुख्यमंत्री नीतीश की साख से है। भाजपा की उम्मीदें मुस्लिम मतों में बिखराव के साथ-साथ सांसद पप्पू यादव और असदुद्दीन ओवैसी के बेहतर प्रदर्शन पर टिकी है।
भाजपा की कोशिश मिथिलांचल और कोसी की 29 सीटों पर बेहतर प्रदर्शन कर मुस्लिम बहुल सीमांचल की 26 सीटों पर होने वाले सियासी घाटे की भरपाई करने की है।
यही कारण है कि भाजपा ने जहां कोसी और मिथिलांचल के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी है। वहीं राजद सुप्रीमो लालू और मुख्यमंत्री नीतीश ने भी यहां भाजपा को बढ़त हासिल न होने देने केलिए रैलियों की भरमार लगा दी है।
लालू के करिश्मे पर टिकी महागठबंधन की उम्मीद
चुनाव में मतदान का चार दौर पूरा हो जाने के बाद भले ही राजग और महागठबंधन आधिकारिक तौर पर अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, मगर अंदरखाने दोनों गठबंधनों के नेताओं का मानना है कि ताजपोशी का फैसला तो अंतिम चरण ही करेगा।
दोनों ही गठबंधनों केनेता मानते हैं कि पहले दो चरण में जहां महागठबंधन को बढ़त हासिल हुआ, वहीं तीसरे और चौथे चरण में राजग को बढ़त मिली।
दोनों ही गठबंधनों के आंतरिक आकलन पर भरोसा किया जाए तो चार चरण के मतदान के बाद निर्णायक बढ़त की तस्वीर नहीं बनी है। जाहिर है कि ऐसे में पांचवां चरण बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
अंतिम चरण में अगर ओवैसी और पप्पू की पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया तो इसका लाभ राजग को मिलेगा। क्योंकि इससे केवल महागठबंधन का वोट बैंक माने जाने वाले मुसलमान और यादव वोटों में बंटवारा होगा। इसके उलट अगर इनका प्रदर्शन फीका रहता है तो महागठबंधन को सियासी लाभ हासिल होगा।
जहां तक बीते विधानसभा चुनाव की बात है तो तब इन 57 सीटों में से भाजपा के खाते में 23, जदयू को 20, राजद को 8, लोजपा को 2, कांग्रेस को 3 और निर्दलीय के खाते में 1 सीट गई थी। तब जदयू राजग का हिस्सा था। अब जदयू, कांग्रेस और राजद एक हैं तो बदली परिस्थितियों में लोजपा भाजपा के साथ है।