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विरोधी खेमे के लिए लालू ने खोले दरवाजे, भाजपा का दावा, कोई कहीं नहीं जा रहा

Sun, 30 Jul 2017 10:09 PM IST
आशीष झा/अमर उजाला, पटना
आशीष झा/अमर उजाला, पटना Updated Sun, 30 Jul 2017 10:09 PM IST
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 Lalu prasad yadav opened doors for opposition leaders
लालू यादव - फोटो : SELF
चार साल बाद नीतीश की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में वापसी, जदयू और भाजपा के सहयोगी दलों के कुछ नेताओं को रास नहीं आई है। एक ओर जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव नीतीश के फैसले से नाराज हैं। वहीं, एनडीए के सहयोगी दल ‘रालोसपा’ और ‘हम’ भी मौजूदा कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक लालू ने इन असंतुष्ट नेताओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। लालू ने शरद यादव को नेतृत्व संभालने का निमंत्रण तक दे डाला है। लालू ने कहा कि शरद को साथ लेकर भाजपा से लड़ेंगे। शरद हमारे साथ थे और रहेंगे। हमने और शरद ने साथ लाठी खाई है, संघर्ष किया है। आज देश को फिर संघर्ष की जरूरत है। हम नया आंदोलन खड़ा करेंगे। दक्षिणपंथी तानाशाही को नेस्तनाबूद कर देंगे।
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लालू की इस अपील पर जदयू ने तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि कोई कहीं नहीं जा रहा है। कैबिनेट में अभी काफी जगह खाली है और शीघ्र ही उसका विस्तार होगा। बता दें कि जदयू और भाजपा के बीच हुए समझौते में केवल लोजपा के लिए ही जगह बन पाई है।
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कैबिनेट विस्तार में हिस्सेदारी पर निर्भर करेगी दोस्ती

 Lalu prasad yadav opened doors for opposition leaders
लालू प्रसाद यादव - फोटो : SELF

सूत्रों के मुताबिक ‘रालोसपा’ के उपेंद्र कुशवाहा और ‘हम’ के जीतनराम मांझी राजग के साथ कितने दिन रहेंगे यह सब नीतीश कैबिनेट और केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार में इनकी हिस्सेदारी पर निर्भर करेगा। सूत्र बताते हैं कि मंत्रिमंडल में कायस्थ समाज से किसी को शामिल नहीं करने का भी विरोध शुरू हो गया है। सांसद आरके सिन्हा और जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने इस पर नाराजगी जाहिर की है।

आसान नहीं होगा घटक दलों को मनाना
जदयू के अलावा राजग के पास बिहार में 61 विधायक हैं। उसमें भाजपा के 58 विधायक हैं। ऐसे में यदि मंत्रिमंडल में आठ मंत्रियों का कोरम भरा जाता है, तो जदयू के पांच और भाजपा के खाते दो सीटें जाएंगी। बची हुई एक सीट ‘रालोसपा’ या ‘हम’ में से किसी एक को ही दी जा सकती है। भाजपा अपने कोटे से मंत्री पद देगी इसके आसार कम हैं। ऐसे में घटक दलों की नाराजगी दूर करना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।

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