क्या बिहार में मोदी के रथ को रोक देंगे लालू यादव?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की लालटेन बिहार के चुनावी समर में फिर रोशनी बिखेरती दिख रही है।
पिछले लोकसभा चुनाव में महज तीन सीटों पर सिमटने वाले लालू इस बार वापसी करते दिख रहे हैं। विपक्षी भी मान रहे हैं कि लालू इस बार मजबूत बनकर उभर सकते हैं।
इन सारी अटकलबाजियों के बीच लालू बिना समय गवाएं इस वक्त उत्तरी बिहार में सुबह से शाम तक चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
लालू कर रहे जीतोड़ मेहनत
राज्य के इस हिस्से की 13 लोकसभा सीटों के लिए आखिरी चरण में वोट डाले जाएंगे।
लालू पटना स्थित अपने आवास पर पत्रकारों के एक छोटे समूह को बताते हैं, ‘मैं रात के तीन बजे तक चुनाव प्रचार कर रहा हूं और चार बजे पटना वापस आ रहा हूं।’
कई सीटों पर यादव-मुस्लिम प्रभाव वाले उत्तरी बिहार में राजद को अधिक से अधिक सीटें दिलाने के लिए लालू जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं।
'मोदी की विकास की सभी बातें फर्जी'
लालू अपने अंदाज में कहते हैं, ‘मोदी द्वारा की जाने वाली विकास की सभी बातें फर्जी हैं। मेरा मानना है कि असली मुद्दा उन सांप्रदायिक शक्तियों से मुकाबला है, जिनका मोदी प्रतिनिधित्व करते हैं। जनता समझ रही है कि क्या हो रहा है। लोग मूर्ख नहीं हैं।’
लालू कहते हैं कि पिछले कुछ सप्ताह के दौरान लोगों का जिस तरह से समर्थन मिला, उससे वह खुद आश्चर्यचकित हैं।
वह कहते हैं, ‘जब मैं जेल से बाहर आया तो मुझे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि मुझे लोगों का इस तरह से समर्थन मिलेगा।’
मुसलमान इस चुनाव में लालू के साथ
भारतीय जनता पार्टी भी सार्वजनिक तौर पर यह मान रही है कि लालू इस लोकसभा चुनाव में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
यहां लगभग हर कोई इस बात से सहमत है कि बिहार लालू के फिर से अप्रत्याशित उभार का गवाह बन रहा है। भाजपा यह मान रही है कि लालू के राजद को नीतीश कुमार के जेडीयू के मुकाबले ज्यादा फायदा हो रहा है।
राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने अमर उजाला को बताया कि लालू ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को वाकई में बनाए रखा है। यही कारण है कि राज्य के मुसलमान इस चुनाव में उनके साथ खड़े हैं।
अति पिछड़े वोटों के बंटवारे का होगा फायदा
इसलिए बहुत सी सीटों पर भाजपा और राजद के बीच सीधा द्विपक्षीय मुकाबला है। सुशील मोदी यह भी मानते हैं कि लालू के पास यादव और मुस्लिम मतदाता हैं, जो बहुत सी सीटों पर करीब 30 फीसदी बैठते हैं।
लेकिन लालू को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए 10 से 15 फीसदी तक अति पिछड़ों और दलित मतदाताओं की जरूरत है।
यह वर्ग नीतीश कुमार के साथ रहा है और हमेशा ही भाजपा-जदयू गठबंधन का समर्थन करता रहा है। इसमें से बहुत से मतदाता पिछड़े वर्ग के होने के कारण इस बार मोदी के प्रति आकर्षित हैं।
बिहार में है 108 अति पिछड़ी जातियां
हालांकि लालू का खेमा सुशील मोदी के इस तर्क को खारिज करता है। वह कहता है कि लाखों गरीब अति पिछड़े लोग मोदी को नहीं पहचानते।
क्योंकि मोदी गुजरात से आते हैं। लालू की बेटी मीसा भारती कहती हैं, ‘अगर भाजपा को लगता है कि वह अति पिछड़ों का वोट पाएगी तो उन्होंने अति पिछड़े उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में क्यों नहीं उतरा।’
बिहार के अति पिछड़ों में बुनकर, नाई, धोबी जैसी करीब 108 सबसे ज्यादा पिछड़ी जातियां शामिल हैं। ये लोग कुल मतदाताओं का करीब 33 फीसदी हैं।
अति पिछड़े निर्णायक भूमिका में
काफी बिखराव के बाद भी हर जाति राज्य की जनसंख्या की करीब दो से तीन फीसदी ठहरती है। यह वर्ग अभी तक एनडीए के पास था। कुछ अगड़ी जातियों और अति पिछड़ों के बल पर भी भाजपा-जदयू यहां लालू का ‘माई’ समीकरण के असर को खत्म करने में कामयाब रहे।
बिहार के वर्तमान वोटिंग ट्रेंड को देखें तो अति पिछड़ी जातियां राज्य के तीन मुख्य दलों भाजपा, कांग्रेस और जदयू में बंटी दिखाई पड़ती हैं।
अगर अति पिछड़े मतदाताओं के 33 फीसदी वोटों का बंटवारा हुआ तो इसका फायदा सीधे तौर पर लालू को होगा। भाजपा और जदयू एक साथ जब मिलकर लड़ती थीं तो ऐसा नहीं होता था।
जाने किस करवट बैठेगा ऊंट
इसलिए कहा जा सकता है कि इस आम चुनाव में बिहार में कुछ चौंकाने वाला जरूर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल यह अनुमान लगाना कठिन है कि अति पिछड़े किधर वोट डालेंगे। फिलहाल भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश के मुकाबले बिहार में ज्यादा अनिश्चितता दिख रही है। यूपी में भाजपा भले ही मोदी रथ पर सवार होकर जीत के प्रति आश्वस्त दिखे, लेकिन बिहार के बारे में ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
'लालू ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को वाकई में बनाए रखा है। यही कारण है कि राज्य के मुसलमान इस चुनाव में उनके साथ खड़े हैं। इस लिए बहुत सी सीटों पर भाजपा और राजद के बीच सीधा द्विपक्षीय मुकाबला है।, -सुशील कुमार मोदी, भाजपा नेता