Bihar: कोयला व्यवसायी के घर में लगी भीषण आग; सूचना के डेढ़ घंटे बाद पहुंची दमकल टीम, पुलिस पर लगा दिया यह आरोप
Supaul News: स्थानीय लोगों ने दावा किया कि रात 12:20 बजे से दमकल टीम के पहुंचने तक कई बार कॉल किया गया। लेकिन हर बार झूठ बोला जाता रहा। यहां तक कि दमकल की टीम ने कॉल पर डायल 112 की टीम द्वारा उन्हें वापस लौटाने की बात तक कह दी।
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बिहार के सुपौल जिले के सिमराही नगर पंचायत स्थित वार्ड 4 में गुरुवार की देर रात अचानक आग लगने से एक ही परिवार के तीन घर जल गए। वहीं, इस दौरान फायर ब्रिगेड की बड़ी लापरवाही सामने आई है। साथ ही प्रशासनिक सजगता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, सिमराही वार्ड 4 निवासी कोयला कारोबारी रामप्रसाद साह के घर में गुरुवार की देर रात करीब 12 बजे अचानक आग लग गई। हालांकि अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि आग की लपटें उठने के साथ ही रात 12:20 बजे कॉल कर दमकल को सूचना दी गई थी। साथ ही इस बीच स्थानीय लोग भी आग बुझाने में जुट गए थे। लोगों ने बताया कि कुछ देर में आग परिसर में रखे कोयले के ढेर में भी लग गई। उसके बाद तेज लपटों से लोगों में हड़कंप मच गया।
इधर, कोयला कारोबारी रामप्रसाद साह के बेटे उमेश साह ने बताया कि रात करीब 11:30 बजे परिवार के सभी लोग खाना खाकर सो गए थे। अचानक आग की लपटें उठने के बाद नींद खुली। आग लगने में दो लाख से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
‘झूठ बोलते रहे दमकल वाले’
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई बार कॉल करने के बाद भी रात करीब 01:30 बजे दमकल की पहली गाड़ी प्रतापगंज से पहुंची। वहीं, इसके 15 मिनट बाद वीरपुर से दूसरी बड़ी गाड़ी और उसके 10 मिनट बाद तीसरी छोटी गाड़ी पहुंची। लोगों ने दावा किया कि रात 12:20 बजे से दमकल टीम के पहुंचने तक कई बार मोबाइल नंबर 7485805851 पर कॉल किया गया। लेकिन हर बार झूठ बोला जाता रहा। यहां तक कि दमकल की टीम ने कॉल पर डायल 112 की टीम द्वारा उन्हें वापस लौटाने की बात तक कह दी। दमकल की टीम जब तक घटनास्थल पर पहुंची, आग पर काबू पा लिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद आग को पूरी तरह बुझाने के लिए दमकल की टीम को करीब एक घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।
थानाध्यक्ष बोले- छुट्टी पर था ड्राइवर
इधर, प्रतापगंज थानाध्यक्ष प्रमोद झा ने बताया कि अग्निशमन गाड़ी का चालक छुट्टी पर था। बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निजी ड्राइवर को दमकल गाड़ी के साथ घटनास्थल के लिए भेजा गया। थानाध्यक्ष के अनुसार, पहले फोन पर आग लगने की सूचना दी गई और फिर कुछ देर बाद बताया गया कि आग बुझ गई है। इसी वजह से अग्निशमन टीम को पहुंचने में देरी हुई।
अधिकारी बोले- मामले की होगी जांच
वहीं, जिला अग्निशमन पदाधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि सुपौल के अतिरिक्त उन्हें सहरसा और मधेपुरा जिले का भी प्रभार है। तीन जिलों का प्रभार होने की वजह से मामला उनके संज्ञान में नहीं है। लेकिन अगर टीम सूचना के बावजूद देर से पहुंची है तो यह गंभीर विषय है। इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।