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BNMU: निलंबित PHD स्टूडेंट्स ने राष्ट्रपति से मांगी आत्मदाह की अनुमति; राज्यपाल के सामने जान देने की चेतावनी

Tue, 11 Feb 2025 07:44 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Tue, 11 Feb 2025 07:44 PM IST
सार

Madhepura News: बीएन मंडल विश्वविद्यालय के दो पीएचडी शोधार्थियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिख आत्मदाह करने की अनुमति मांगी है। दोनों ने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के सामने आत्मदाह कर जान दे देंगे। जानें पूरा मामला...।

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BNMU: Suspended PHD students sought permission from President to commit self-immolation
पीएचडी शोधार्थी अरमान अली और मौसम कुमारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा में प्रशासन और छात्रों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। दो पीएचडी शोधार्थियों अरमान अली और मौसम कुमारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आत्मदाह की अनुमति मांगी है। दोनों छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की तानाशाही और अन्यायपूर्ण नीतियों के कारण उन्हें मानसिक और शैक्षणिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे 19 फरवरी को राज्यपाल के सामने आत्मदाह करेंगे।

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‘छात्र हितों के लिए आवाज उठाने पर मिला निलंबन’
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के विश्वविद्यालय अध्यक्ष और भौतिकी के शोध छात्र अरमान अली ने बताया कि उन्होंने छात्रों की समस्याओं को लेकर कई बार कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा से मुलाकात की थी। इसके अलावा विभिन्न छात्र आंदोलनों का नेतृत्व भी किया। उनका आरोप है कि इसके बदले उन्हें धमकी भरे नोटिस दिए गए, परीक्षाओं में जानबूझकर फेल किया गया और अंततः पीएचडी कोर्स से निलंबित कर दिया गया।
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अरमान का दावा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके गाइड पर भी दबाव बनाकर शोध निर्देशन से हटने के लिए मजबूर किया। इसके अलावा जाति और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां भी की गईं। अरमान का कहना है कि अगर छात्रों की आवाज उठाना अपराध है, तो उन्हें आत्मदाह की अनुमति दी जाए।
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महिला उत्पीड़न के आरोपों को दबाने का आरोप
वनस्पति विज्ञान की शोधार्थी और एआईएसएफ की राज्य परिषद सदस्य मौसम कुमारी ने भी राष्ट्रपति को पत्र लिख आत्मदाह की अनुमति मांगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के एक शिक्षक पर महिला उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे थे, लेकिन प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच कराने के बजाय उन्हें परीक्षा नियंत्रक बना दिया।
 
मौसम कुमारी ने जब इस अन्याय के खिलाफ आंदोलन किया, तो उन्हें पीएचडी से निलंबित कर दिया गया और उनका रजिस्ट्रेशन रोक दिया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर जाति और वर्ग आधारित भेदभाव करने, छात्र विरोधी नीतियां अपनाने और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
 
राज्यपाल के समक्ष आत्मदाह की चेतावनी
दोनों छात्रों ने स्पष्ट किया कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे 19 फरवरी को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल के समक्ष आत्मदाह करेंगे। इस धमकी के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बढ़ गया है और छात्र संगठनों में आक्रोश है।
 
दरअसल, परीक्षा नियंत्रक डॉ. शंकर कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। आरोप था कि जिन छात्रा ने परीक्षा नियंत्रक पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था, उन्होंने बाद में अपने आरोप वापस ले लिए। इसके बावजूद कई छात्रों का मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पारदर्शिता और निष्पक्षता से दूर हो चुका है।
 
गाली-गलौज और हमले के आरोप में हुआ निलंबन
14 सितंबर 2024 को बीएन मंडल विश्वविद्यालय प्रशासन ने पत्र जारी कर मौसम कुमारी को पीएचडी कोर्स से निलंबित कर दिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सात सितंबर को परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति के विरोध में मौसम कुमारी और अरमान अली ने विवि कार्यालय का घेराव किया था। आरोप है कि कुलपति के लौटने के दौरान उनकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई और उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।
 
इन्हीं आरोपों के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों छात्रों को पीएचडी से निलंबित कर दिया। हालांकि दोनों छात्रों का कहना है कि उन्हें बिना किसी ठोस जांच या स्पष्टीकरण का मौका दिए ही निलंबित कर दिया गया।

 
छात्र संगठनों में आक्रोश, प्रशासन पर लगे भेदभाव के आरोप
इस पूरे मामले को लेकर बीएन मंडल विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई छात्र संगठनों ने प्रशासन पर जातीय और वर्गीय भेदभाव करने का आरोप लगाया है। वहीं, आत्मदाह की धमकी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।

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