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Bihar Politics: 'परिवार की कलह खत्म करें लालू प्रसाद यादव', आपसी मतभेदों को लेकर बोले पूर्व सांसद आनंद मोहन
Mon, 17 Nov 2025 07:29 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहरसा
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Mon, 17 Nov 2025 07:29 PM IST
सार
Bihar News: आनंद मोहन ने सीधे तौर पर लालू प्रसाद यादव से अपील करते हुए कहा कि लालू प्रसाद न केवल पार्टी के अभिभावक हैं, बल्कि अपने परिवार के भी बड़े संरक्षक हैं। इसलिए उन्हें आगे आकर स्थिति संभालनी चाहिए और पारिवारिक मतभेदों को शांत करना चाहिए।
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पूर्व सांसद आनंद मोहन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सोमवार को सहरसा के गंगजला स्थित अपने आवास पर एक प्रेसवार्ता कर बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महागठबंधन के निराशाजनक प्रदर्शन, लालू प्रसाद यादव के परिवार में कथित मतभेदों और लोकतंत्र में महिला मतदाताओं की बढ़ती भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बात की।
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राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में कथित तौर पर चल रहे मतभेदों पर टिप्पणी करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब नेतृत्व को खुद हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह चर्चा आम है कि लालू परिवार में 'बाहरी लोगों का हस्तक्षेप' बढ़ गया है।
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आनंद मोहन ने सीधे तौर पर लालू प्रसाद यादव से अपील करते हुए कहा कि लालू प्रसाद न केवल पार्टी के अभिभावक हैं, बल्कि अपने परिवार के भी बड़े संरक्षक हैं। इसलिए उन्हें आगे आकर स्थिति संभालनी चाहिए और पारिवारिक मतभेदों को शांत करना चाहिए।" उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पार्टी का खराब चुनावी प्रदर्शन भी इन पारिवारिक कलह का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिसे तुरंत खत्म करना अनिवार्य है।
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महागठबंधन की हार की वजह: एकजुटता में कमी
महागठबंधन के अपेक्षित नतीजे न आने पर आनंद मोहन ने हार का ठीकरा घटक दलों की एकजुटता पर फोड़ा। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के दलों में समन्वय और एकजुटता की कमी साफ दिखी, जिसका सीधा नुकसान चुनाव परिणामों में देखने को मिला। उन्होंने 'वोट चोरी' के नैरेटिव पर भी विपक्ष को घेरा। आनंद मोहन ने आरोप लगाया कि विपक्ष को बदनाम करने के लिए जानबूझकर वोट चोरी का नैरेटिव फैलाने की कोशिश की गई, जबकि यही ईवीएम जब पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में जीत दिलाती है, तब उस पर कोई सवाल नहीं उठाता और उसे जनादेश बता दिया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोपरि है और सभी राजनीतिक दलों को इस जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
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महिला वोटरों की भूमिका अभूतपूर्व
पूर्व सांसद आनंद मोहन ने इस चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि इस बार के चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी अभूतपूर्व रही। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार लगभग 46.5 लाख महिलाओं ने अधिक मतदान किया। उन्होंने बताया कि जहां पुरुषों के मतदान में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं महिलाओं ने 5 प्रतिशत अधिक वोट डालकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी मजबूती और जागरूकता का स्पष्ट परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि राजनीतिक प्रक्रिया को एक नया आयाम दे रही है। अंत में, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को सुझाव दिया कि वे जनता के मत का सम्मान करें और हार के कारणों पर गंभीर पुनर्विचार करते हुए अपनी रणनीतियों में बदलाव लाएं।