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Bihar: अस्पताल में मरीज का महिला तांत्रिक से झाड़-फूंक; डॉक्टर की बात नहीं मानकर अंधविश्वास में डटे रहे परिजन

Wed, 06 Aug 2025 06:59 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल Published by: आदित्य आनंद Updated Wed, 06 Aug 2025 06:59 PM IST
सार

Bihar: 50 वर्षीय किसान को मंगलवार शाम खेत में कुदाल चलाते समय जहरीले सांप ने डंस लिया। राघोपुर रेफरल अस्पताल में बुधवार की सुबह उसका इलाज शुरू हुआ। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे 28 एंटीवेनम इंजेक्शन लगाए गए।

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Bihar News: snakebite patient was treated with exorcism in hospital in Supaul Bihar; superstition
झाड़-फूंक करती महिला तांत्रिक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुपौल जिले के राघोपुर से अंधविश्वास की खबर सामने आई है। जहां सर्पदंश के एक मरीज का अस्पताल परिसर में ही झाड़फूंक शुरू कर दिया गया। हालांकि डॉक्टरों ने संजीदगी से इलाज कर मरीज को बचा लिया है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी अंधविश्वास की गहरी जड़ें जमी हुई हैं। आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और वैज्ञानिक उपलब्धियों के बावजूद लोग झाड़-फूंक जैसे अवैज्ञानिक तरीकों पर भरोसा कर रहे हैं। दरअसल, मामला राघोपुर प्रखंड अंतर्गत हुलास वार्ड संख्या 9 का है। जहां 50 वर्षीय जगदीश सादा मंगलवार की शाम लगभग चार बजे खेत में कुदाल चला रहे थे, तभी एक जहरीले सांप ने उन्हें डंस लिया। परिजनों ने तुरंत उन्हें राघोपुर रेफरल अस्पताल पहुंचाया, जहां बुधवार की सुबह ड्यूटी पर मौजूद डॉ विपिन तिवारी ने मरीज को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया। मरीज की हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टर ने लगातार 28 एंटीवेनम इंजेक्शन लगाए।

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परिजन अंधविश्वास से बाहर नहीं निकल सके
डॉक्टरों की तत्परता और इलाज से मरीज की स्थिति स्थिर हो गई, लेकिन इसके बावजूद परिजन अंधविश्वास से बाहर नहीं निकल सके। डॉक्टर और सुरक्षा गार्ड द्वारा बार-बार मना करने के बावजूद परिजन एक महिला तांत्रिक को अस्पताल ले आए और इमरजेंसी वार्ड के भीतर ही झाड़-फूंक करवाने लगे। इस दौरान अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर ने उन्हें रोका भी, लेकिन महिला तांत्रिक और परिजन नहीं माने।
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ससमय इलाज नहीं होने पर जा सकती थी मरीज की जान
अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉ विपिन कुमार ने बताया कि मरीज जब अस्पताल आया था, तब उसकी हालत बेहद नाजुक थी। लेकिन समय पर इलाज और एंटीवेनम देने से उसकी जान बचाई जा सकी। फिलहाल वह खतरे से बाहर है। इसके बावजूद परिजन अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर अंधविश्वास का सहारा ले रहे हैं, जो कि न केवल गलत है, बल्कि दूसरे मरीजों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करता है। अगर मरीज का समय से इलाज नहीं होता तो उसकी जान को खतरा हो सकता था।

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