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कोसी से ख़तरा, पर खाली हैं राहत शिविर
नीरज सहाय/सहरसा, बिहार से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
Updated Wed, 06 Aug 2014 08:54 AM IST
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उत्तरी बिहार के सहरसा ज़िले में उफनती कोसी से ज़िंदगी, खेती और घरों को ख़तरा पूरी तरह टला नहीं है। तटबंध के भीतरी इलाक़े में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर जा तो रहे हैं, लेकिन ज़्यादातर लोग सरकारी शिविरों तक नहीं पहुंच रहे।
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वो तटबंध पर खुले आसमान के नीचे अस्थायी ठिकाने बना रहे हैं और वहीँ रुक रहे हैं। सहरसा के एक ग्रामीण ज्ञान कुमार सदा अपने टोले के लोगों के साथ महिषी-कोसी तटबंध पर रुके हैं। राहत शिविर घर से दूर होने के कारण वे नहीं जा रहे हैं।
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ज्ञान कुमार को शिविर में शौचालय और रहने के लिए कमरों की संख्या की समुचित व्यवस्था होने पर भी संदेह है। इसी टोले के चंद्र किशोर सदा का कहना है कि अगर शिविर बगल के गमरोहो गाँव में होता तो वो वहां जा सकते थे। प्रशासन ने ज़िले में 28 राहत शिविर लगाए हैं लेकिन ज्यादातर शिविर खाली ही पड़े हैं।
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खाली पड़े राहत शिविर
मैना गाँव के गंगा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिविर के कुछ कमरे खाली तो कुछ में ताले लगे थे। यहाँ स्थानीय प्रशासन द्वारा नियुक्त एक भी अधिकारी नहीं दिखा।
जबकि, यहाँ चिकित्सक समेत करीब पांच अन्य सरकारी कर्मियों को ड्यूटी पर लगाया गया था। वहीं, महिषी प्रखंड कार्यालय से सटे सरकारी स्कूल में महज़ दो सरकारी नुमाइंदे दिखे। जिन्होंने पूछने पर कहा कि अभी यहाँ कोई नहीं है। इन दोनों राहत शिविरों में एक भी बाढ़ पीड़ित नहीं था।
व्यवस्था
राजनपुर पंचायत के आदर्श संकुल मध्य विद्यालय शिविर में अलग-अलग टोलों के लोग दिखाई दिए। यहाँ दम्गौरी टोला की 12 साल की गौरी कुमारी भी अपने परिवार के साथ आई हैं।
हालांकि गौरी ने भात और बैंगन की सब्जी खाई है लेकिन चैनपुर टोला की रंजो देवी की शिकायत थी कि उन्हें अभी तक खाना नहीं मिला है। कुल मिलाकर लोग अपने गांव से दूर राहत शिविरों तक नहीं जाना चाह रहे हैं और साथ ही कुछ को वहां के इंतज़ाम पर भी संदेह है।