आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े गए जज हो गए बहाल
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पटना हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आज तीन जजों की बर्खास्तगी के अपने ही फैसले को रद्द कर दिया। बीते साल फरवरी में अमर्यादित आचरण के आरोप में अलग-अलग जिला अदालतों में पदस्थापित तीन जजों को पटना हाइकोर्ट की अनुशंसा पर बर्खास्त कर दिया गया था। पटना हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एल. नरसिम्हा रेड्डी और न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को इस फैसले को रद्द कर दिया।
जिन जजों को बर्खास्त किया गया था, वे थे हरिनिवास गुप्ता, जितेंद्र नाथ सिंह और कोमल राम। तीनों पर आरोप था कि नेपाली पुलिस की छापेमारी में वे सभी नेपाल के विराटनगर के एक होटल में आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े गए थे।
यह था कार्रवाई का आधार
घटना पिछले साल जनवरी की है। घटना के बाद पूरे मामले की जांच हुई थी और पटना हाई कोर्ट की ‘फुल कोर्ट मीटिंग’ में 8 फरवरी को इन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश की गई थी। इसके खिलाफ तीनों बर्खास्त जजों ने हाइकोर्ट में ही अपील दायर की थी।
मंगलवार को पटना हाइकोर्ट की खंडपीठ ने यह कहते हुए बर्खास्तगी रद्द कर दी कि आरोपों की जांच के लिए बनी समिति के गठन में प्रक्रियाओं का ध्यान नहीं रखा गया था। अभियुक्तों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिए जाने को भी कोर्ट ने अपने फैसले का आधार बनाया।
साथ ही खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि हाईकोर्ट प्रशासन बर्खास्तगी संबंधी अपने फैसले को सही साबित नहीं कर पाया। फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा है कि हाईकोर्ट प्रशासन अगर फिर से मामले की जांच कराना चाहता है तो इस संबंध में वह दो महीने के अंदर फैसला करे।